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स्वामिनी नंदा ने कहा-अपना उद्धार स्वयं करें
भास्कर न्यूज - अमृतसर
भगवान श्री कृष्ण गीता के छठे अध्याय में एक यूनिवर्सल मैसेज देते हुए कहते हैं कि हमें स्वयं अपने आप को ऊपर उठाने का प्रयास करना चाहिए। अपनी प्रकृति स्थिति और प्रकृति के अनुसार अपने आप का विकास करना है। पूज्य स्वामिनी विमला नंदा जी ने चिन्मय अमृत आश्रम रणजीत एवेन्यू के ई ब्लॉक में ध्यान योग पर प्रवचन करते हुए उपरोक्त विचार रखे। उन्होंने कहा कि हम हमारे आदर्शों के अनुरूप व्यवहार नहीं करते हैं। हमारे व्यवहार का स्तर आदर्शों की अपेक्षा नीचे होता है। आदर्श और व्यवहार के इसी अंतर के कारण हमें आत्मग्लानि होती है। हमें व्यवहार को आदर्श अनुसार श्रेष्ठ बनाकर इस अंतर को समाप्त करना चाहिए। हमारा मन शत्रु और वही मन जब बुद्धि के साथ सहयोग करता है, तो वही मन हमारा मित्र बन जाता है। जिसे बदलना बहुत मुश्किल होता है। उन्होंने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद ने सच्ची स्वतंत्रता की परिभाषा देते हुए कहा था कि अपने मन को न कहने की योग्यता ही सच्ची स्वतंत्रता है। इस समागम में मेयर बख्शी राम अरोड़ा, पूज्य ब्र. तारक चैतन्य सहित मिशन परिवार के सदस्य विशेष रूप से उपस्थित थे।