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सिटी बसें चलने से शहरवासी खुश, मगर बाहरी कंडक्टरों को स्टॉपेज की पहचान नहीं
भास्कर टीम - अमृतसर
नगर निगम की तरफ से बुधवार को दुबुर्जी-बस स्टैंड-इंडिया गेट रूट पर अधूरी तैयारी के साथ ही सिटी बस उतारी गई।
इस रूट से अंजान ड्राइवर और कंडक्टर सवारियों से ही हर चौक के बारे में पूछते रहे। यही नहीं बस स्टापेज तय नहीं किए जाने के कारण कई चौकों पर बस को रोका ही नहीं गया, जिससे यात्रियों को पैदल चलना पड़ा।
इसके अलावा बसों के अंदर मेडिकल बॉक्स में दवाइयां और आग बुझाने वाले यंत्र तक गायब थे। इसके अलावा जीपीएस सिस्टम भी शुरू नहीं हो पाया था। यह सारी बातें इस रूट पर दैनिक भास्कर की टीम द्वारा विभिन्न बसों में किए गए सफर के दौरान सामने आईं।
40 में से सिर्फ 16 बसें ही बुधवार को चलाई गईं
बुधवार को पहले दिन 40 बसों में से 16 बसें दुबुर्जी से बस स्टेंड से नारायणगढ़ इंडिया गेट रूट पर चलाई गईं।
इस दौरान एक बस के चालक ने किचलू चौक जाने की बजाए आधा किलोमीटर पीछे इन्कम टैक्स में ही सवारियों को उतार दिया। बस में सवार अमित शर्मा ने जब कहा कि उसने किचलू चौक उतरना है तो बस चालक कुलविंदर सिंह आगे जाने से इंकार करते हुए जवाब दिया की उनके रूट में यही कचहरी
चौक है।
बस का अटकता रहा दरवाजा
बसों में ऑटोमेटिक डोर क्लोजिंग की सुविधा है। कुछेक बसों की डीजल दर्शाने वाली गेज सुई ही नहीं चल रही थी, ऐसे में डीजल इसके अलावा एक बस का दरवाजा बार-बार अटकता रहा। बस बंद करके दोबारा स्टार्ट करने पर ही दरवाजा खुलने के कारण यात्री को आने-जाने में दिक्कत पेश आई।
ऑटो और पुलिसिया दादागिरी
दुबुर्जी से नारायणगढ़ तक सिटी बसों के पहुंचे में एक घंटे का वक्त लगा।
बस मुलाजिमों के मुताबिक कई
जगहों पर उन्हें ऑटो चालकों ने
धमकियां दी। उनके मुताबिक बुधवार को पहले दिन एक फेरी में औसतन 15 से 20 सवारियों ने सफर किया, इस दौरान पुलिस मुलाजिमों ने सफर तो किया लेकिन पैसे देने की बजाय मुलाजिम होने का रौब झाड़ गए।
अड्डा इंचार्ज के पास रजिस्टर नहीं
रूट के आखिरी स्टाप नारायणगढ़ में संदीप सिंह को बतौर अड्डा इंचार्ज लगाया गया है, मगर वहां उसके बैठने के लिए कुर्सी तो दूर बसों के लेखा-जोखा के लिए रजिस्टर तक मौजूद नहीं था।
एक हफ्ते में दूर करेंगे रूट की
प्राब्लम : सुरेश नायक
॥कुछ ड्राइवरों और कंडक्टरों को रूट के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। इसके लिए उनकी क्लास चल रही है। एक हफ्ते के अंदर मैं गारंटी लेता हूं कि रूट की प्राब्लम दूर हो जाएगी। रही बात मेडिकल किट व फायर सिलेंडरों के न होने की। वह भी बसों में रख दिए गए हैं। पहला दिन होने के कारण कुछ दिक्कतें आई, लेकिन कल और भी अधिक बसें रूट पर उतरेंगी। एक सप्ताह के भीतर हर शिकायत दूर होगी।
सुरेश नायक, प्रवक्ता, अमृतसर सिटी बस सर्विस
बस चलानी चंडीगढ़ से सीख कर आओ
रिटायर्ड टीचर सुखजीत कौर ने ड्राइवर और कंडक्टर को कहा कि बस चलानी है तो चंडीगढ़ जाकर सीखो। चढऩे-उतरने के लिए अलग-अलग दरवाजा निर्धारित किया जाना चाहिए।
ऑटो से 5 रुपए ज्यादा किराया
सेहत विभाग की मुलाजिम कुलवंत कौर ने बताया कि वह छेहर्टा चौक से बस स्टैंड तक के लिए ऑटो रिक्शा को 10 रुपए देती हैं, जबकि इस रूट पर सिटी बस के कंडक्टर ने उनको टिकट देकर 15 रुपए लिए हैं।
महिलाओं के लिए सुरक्षित होगा सफर
हरमीत कौर ने सिटी बस को महिलाओं के लिए सुरक्षित सफर की सुविधा बताया। उन्होंने कहा कि ऑटो में सफर में झटके लगने के अलावा महिलाओं को छेड़छाड़ का सामना भी करना पड़ता था।
भाजी, इह बस कित्थों तक जानी है...
> मेडिकल किटें हैं पर दवाइयां नहीं > आग बुझाऊ यत्रों के स्टैंड खाली > किसी बस का दरवाजा अटका किसी का गियर