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किडनी कांड: स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम के सदस्य की गवाही
भास्कर न्यूज - अमृतसर
बहुचर्चित किडनी कांड के आरोपियों के खिलाफ गवाही देने के लिए इंवेस्टीगेटिंग टीम के सदस्य इंस्पेक्टर अरुण शर्मा वीरवार को न्यायाधीश नवजोत सोहल की कोर्ट में पेश हुए। शर्मा ने कहा कि उनकी जांच में सामने आया था कि अमृतसर बार एसोसिएशन के प्रधान एडवोकेट प्रदीप कुमार सैनी कक्कड़ अस्पताल के लीगल एडवाइजर थे और किडनी ट्रांसप्लांट केसों में कानूनी अड़चनों से बचने के रास्ते बता कर आरोपियों का साथ देते थे। इस गोरखधंधे में डॉ. पीके सरीन, डॉ. पीके जैन, डॉ. भूपिंदर सिंह ने अपना ग्रुप बनाया हुआ था। ग्रुप के लोग मिलीभगत के तहत लोगों को धोखा देकर पैसे कमाते थे। मामले में न्यायाधीश ने 7 फरवरी की तारीख डाली है। ज्ञात रहे कि 25 जनवरी को इस केस में गवाही देने पहुंचे मस्त राम ने भी आरोपियों द्वारा किडनी ट्रांसप्लांट के एवज में उससे 8 लाख रुपए की मांग की थी। मस्त राम ने बताया था कि आठ लाख देकर किडनी ट्रांसप्लांट के बाद उसकी आंखों की रोशनी चली गई थी। इसी तरह सुरिंदर कौर ने कोर्ट को बताया था कि उसके पति को किडनी देने के लिए भी 8 लाख रुपए की मांग की गई थी, लेकिन इससे पहले ही उसके पति का देहांत हो गया था।
मेरा नाम बेवजह जोड़ा गया है : प्रदीप सैनी
॥वर्ष 2003में मैने हाईकोर्ट से एंटी स्प्रेटरी बेल ली थी। तब भी पुलिस ने कोर्ट में मेरे बारे में कक्कड़ अस्पताल का लीगल एडवाइजर होने का हवाला दिया था। मेरे खिलाफ हाईकोर्ट में कोई भी ऐसा डॉक्युमेंट पेश नहीं किया जा सका, जिसे मैने साइन किया हो या फिर कोई फाइल मेरे द्वारा तैयार की गई हो। बाकी लीगल सलाह देना वकील होने के नाते मेरा फर्ज बनता है। मेरा नाम बेवजह केस के साथ जोड़ा गया है, बाकी कोर्ट में मामला विचाराधीन होने के कारण फिलहाल मैं कुछ नहीं बोलना चाहता।
एडवोकेट प्रदीप सैनी, प्रधान अमृतसर बार एसोसिएशन
प्रदीप सैनी आरोपियों को बताते थे बचने के दाव पेंच : अरुण शर्मा