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पूछताछ केंद्र : जानकारी कम, फजीहत ज्यादा
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गुरप्रेम लहरी बठिंडा
शहर में विभिन्न विभागों में भले ही पूछताछ केंद्र बना रखे हैं, लेकिन इनका आम लोगों को कोई फायदा नहीं मिल रहा। इन काउंटरों पर कोई भी मुलाजिम तैनात नहीं किया गया। इसके कारण आम लोग जिला प्रबंधकीय कॉम्प्लेक्स और अन्य जगहों पर भटकते रहते हैं। भास्कर ने बुधवार को शहर के सार्वजनिक स्थलों पर लोगों की समस्या जानी।
जिला प्रबंधकीय कॉम्प्लेक्स
जिला प्रबंधकीय कॉम्प्लेक्स में डीसी दफ्तर के मीटिंग हॉल के नीचे मुख्य गेट के पास बनाए गए पूछताछ केंद्र पर कोई भी मुलाजिम तैनात नहीं किया गया। इस कारण अपने कामों के लिए अफसरों से मिलने के लिए आए लोग भटकते रहते हैं। एक दिन में करीब 2000 लोग अपने कामों के लिए जिला प्रबंधकीय कॉम्प्लेक्स में विभिन्न कामों के लिए आते हैं। उनमें से 80 फीसदी लोगों को ये पता नहीं होता कि जिस अधिकारी से वे मिलने के लिए आए हैं उनका दफ्तर कहां पर है। कॉम्प्लेक्स की इमारत एक जैसी होने के कारण उनको कई बार एक ही दफ्तर में आने के बावजूद भी दफ्तर का पता नहीं चलता। ऐसे में वे लोगों से पूछते घूमते रहते हैं।
पूछताछ केंद्र पर कोई नहीं मिलता
-जिला प्रबंधकीय कांप्लेक्स की इमारत भूल भुलैया है। इसमें जितनी दफा आ जाओ पता नहीं चलता कि कौन सा दफ्तर कहां पर है। और तो और यहां पर पूछताछ केंद्र पर भी कोई नहीं मिला।
-सुनील कुमार, बिजनेसमैन,बठिंडा वासी
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पीआरटीसी बस-स्टैंड
बठिंडा के पीआरटीसी के बस स्टैंड पर भी पूछताछ केंद्र न होने के कारण लोगों को भटकना पड़ रहा है। बस स्टैंड में बनाए गए कंप्यूटर रूम में एक अनाउंसर बैठता है। वो ही समय समय पर बसों की टाइम की अनाउंसमेंट करता रहता है। जबकि पीआरटीसी ने पूछताछ केंद्र में कोई भी व्यक्ति तैनात ही नहीं किया। इसके कारण लोगों को बसों की जानकारी लेने के लिए भटकना पड़ता है। बठिंडा के बस स्टैंड पर रोजाना हजारों लोग पहुंचते हैं। शहर के लोगों के अलावा बाहर से आने वाले लोगों को भी यहां से बस बदलनी होती है। पहले वे बस स्टैंड में पूछताछ केंद्र की तलाश करते हैं लेकिन उनको वो नहीं मिलता। बाद में वे बसों के टाइम व उनके खडऩे की जगह के बारे में दूसरे कंडक्टरों से पूछते रहते हैं।
सवारियों से पूछा बस का पता
मैं डबवाली से आया हूं और मैंने लुधियाना की बस पकडऩी है। लेकिन पूछताछ केंद्र ही नहीं। मैंने दूसरी बसों के ड्राइवरों, कंडक्टरों व दूसरी सवारियों से पूछकर बस का पता किया है। यहां पर अनपढ़ तो क्या पढ़े-लिखे को भी कुछ पता नहीं चलता।
-जसविंदर सिंह,यात्री
कोई कुछ बताने को तैयार नहीं
मैंने शेखू गांव में जाना था और मैं यहां पर सबसे पूछ कर हार हो गया हूं। कोई भी बताने को ही तैयार नहीं है। मैंने पूछताछ केंद्र की तलाश की लेकिन पूछताछ केंद्र ही नहीं मिला।
बलदेव सिंह, यात्री
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रेलवे स्टेशन
रेलवे स्टेशन पर दिन में हजारों लोग आते जाते हैं। स्टेशन पर पूछताछ केंद्र तो स्थापित किया गया है। लेकिन लोगों को गाडिय़ों के बारे में जानकारी लेने में समस्या आ रही है। पढ़े-लिखे लोग तो पूछताछ केंद्र के बाहर लगाए गए पट्ट से ये पढ़ लेते हैं कि कौन सी गाड़ी कितने बजे और किस प्लेटफॉर्म पर आ रही है। लेकिन अनपढ़ लोगों को समस्या का सामना करना पड़ता है। क्योंकि पूछताछ केंद्र में तैनात रेलवे कर्मी जानकारी मांगने पर पट्ट पर डंडा लगा देता है। अगर कोई दोबारा पूछे तो उनके साथ ऊंची आवाज में बात की जाती है।
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मुझे गंगानगर जाना था और मैंने पूछताछ केंद्र पर ट्रेन के बारे में जानकारी मांगी तो वहां पर बैठे रेलवे कर्मी ने लगाए गए पट्ट पर डंडा रख दिया। मैं बिलकुल अनपढ़ हूं। मुझे क्या पता कि क्या लिखा है। मैंने दोबारा पूछा तो उन्होंने बदतमीजी के साथ बताया। इनको चाहिए कि वे लोगों के साथ प्यार से पेश आएं।
-अंग्रेज कौर, रेलवे यात्री, वासी बठिंडा
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हमने डबवाली जाना था। लेकिन पूछताछ काउंटर पर प्लेटफॉर्म का पता करने गए तो उन्होंने ऊंची आवाज से बात की। उन्होंने कहा कि अभी आपसे पहले वाली यात्री को ये ही तो बताया था। मैंने ये ध्यान ही नहीं दिया था कि पहले वाले यात्री ने क्या पूछा था।
तेजा सिंह, रेलवे यात्री
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