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डाउनलोड करेंबठिंडा. मुख्यमंत्री परकाश सिंह बादल और सांसद हरसिमरत कौर बादल के संगत दर्शनों में सीवरेज और ड्रेनेज के मुद्दे को शहर के लोगों ने प्रमुखता से उठाया था। सांसद और सीएम ने सीवरेज बोर्ड के अफसरों को सीवरेज सिस्टम दुरूस्त करने की डेडलाइन भी दी थी मगर सीवरेज सिस्टम कितना अपडेट हो सका है इसकी असलियत बुधवार को हुई बारिश में सामने आ गई। रुक-रुक कर हुई बारिश से शहर की कई सड़कें पानी से भर गई।
पावर हाऊस रोड, 100 फुटी रोड, सिरकी बाजार सहित कई निचले इलाकों में बारिश का पानी रात तक भरा रहा। मौसम विभाग के मुताबिक बुधवार को 16 एमएम बारिश दर्ज की गई। वहीं आज भी बारिश होने की संभावना जताई गई है।
ड्रेनेज सिस्टम फेल, डेढ़ फुट तक भरा पानी : एक बार फिर हल्की बारिश में ही ड्रेनेज सिस्टम फेल साबित हुआ। सिरकी बाजार, पावर हाऊस रोड, 100 फुटी, भागू रोड, धोबियाना रोड, परसराम नगर, सेंट्रल जेल रोड पर करीब डेढ़ फुट तक पानी भर गया। इस बीच कई लोगों की गाडिय़ां बीच में ही बंद हो गई। पावर हाऊस रोड के दुकानदारों ने बताया कि हर बार थोड़ी से बारिश में ही उनकी दुकानों के सामने पानी भर जाता है।
9-10 नवंबर को सीएम-सांसद के सामने उठी थी सीवरेज-ड्रेनेज की समस्या : शहर में 10 नवंबर को सीएम बादल और सांसद हरसिमरत कौर के संगत दर्शन में शहरवासियों ने सीवरेज और ड्रेनेज की समस्या को प्रमुखता से उठाया था। तब सीएम ने सीवरेज बोर्ड के एमडी सतपाल एंगुरेला को 40 करोड़ के सीवरेज प्रोजेक्ट के डिस्पोजल निर्माण को समय पर पूरा करने और ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करवाने के आदेश दिए थे।
5 जनवरी को सांसद से मिले थे सिरकी बाजार के लोग : 5 जनवरी को शहर में हुए सीएम-सांसद के संगत दर्शन में सीवरेज और बरसात के मौसम में निकासी नहीं होने की समस्या को लोगों ने प्रमुखता से उठाया था। इस दौरान सिरकी बाजार के भाजपा पार्षद राज कुमार सूद के नेतृत्व में दुकानदार सीएम से मिले थे।
दुकानदारों ने कहा था कि बरसाती पानी की निकासी के लिए सिरकी बाजार में 1.60 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं मगर फिर भी थोड़ी सी बारिश में ही पानी भर जाता है। इस सांसद बादल ने कहा था कि मेरा घर तो दिल्ली में प्रधानमंत्री के घर के साथ है, बरसात आती है तो मेरा घर भी डूब जाता है। वहीं डीसी ने भी चुटकी लेते हुए कहा था कि मेरी सरकारी कोठी सिविल लाइन में है, उसमें भी बरसात में पानी भर जाता है।
सूखी ठंड से बचेंगे नौनिहाल : सिविल अस्पताल के डॉक्टर सतीश जिंदल ने कहा कि बारिश पडऩे से सूखी ठंड समाप्त हो जाएगी। सूखी ठंड बच्चों के लिए खतरनाक होती है। बारिश होने से बीमारियों पर भी कंट्रोल होगा। उन्होंने कहा कि बच्चों को बारिश में भीगने न दें। ऐसे बदलते मौसम में बच्चे हाइपोथरमिया की चपेट में आ सकते हैं। इस लिए बच्चों को अधिक से अधिक गर्म कपड़े पहनाने की जरूरत है। उधर, गणतंत्र दिवस को लेकर रिहर्सलों का दौर जारी है मगर बरसात हो जाने के कारण बुधवार को स्कूली छात्र रिहर्सल में भाग लेने नहीं पहुंचे।
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