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सरकार की अनदेखी के कारण खतरे में है विरासत

8 वर्ष पहले
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प्रमुख संवाददाता - बठिंडा
बठिंडा में पर्यटन की तरफ बढ़ावा नहीं देने से इसका दंश झेल रहा है शहर। इसके नाम पर शहर में केवल पर्यटन विभाग का सिर्फ बोर्ड ही लगा है। जो अब टूटने लगा हैं। बठिंडा में ऐतिहासिक किले को प्रदेश सरकार ने कभी तवज्जो ही नहीं दी। प्रदेश सरकार कभी किले में दौरा तक नहीं किया।
यहीं नहीं बठिंडा के विरासती गांव जयपालगढ़ को केंद्र सरकार ने 50 लाख रुपये जारी करने का एलान किया था। लेकिन अब तक एक फूटी कढी भी गांव को नसीब नहीं हुई। पर्यटन विभाग को शहर में इनफारमेशन सेंटर बनाया जाना था, जो अब तक नहीं बन पाया।
पर्यटन विभाग ने जिला प्रबंधकीय कांप्लेक्स में एक दफ्तर खोल रखा है। इसमें तैनात कर्मचारी अब तक डाटा कलेक्शन में ही लगे हुए हैं। बठिंडा की एक मात्र ऐतिहासिक धरोहर के रखरखाव के लिए कांग्रेस सरकार द्वारा जारी सवा करोड़ रुपये के फंड को बठिंडा से कहीं और ट्रांसफर कर दिया गया।
बठिंडा के 1800 साल पुराने जंगी किले के जर्जर रानी महल की इमारत पर खर्च होने वाली ग्रांट को मुख्यमंत्री के पैतृक गांव बादल को संवारने पर खर्च कर दिया गया। इसका एक हिस्सा मलेरकोटला की एक धार्मिक ट्रस्ट को ट्रांसफर कर दिया गया था।
पूर्व मुख्यमंत्री ने रानी महल के लिए दिए थे सवा करोड़़
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह फरवरी 2006 में बठिंडा के किला मुबारक में आयोजित एक धार्मिक समागम में शरीक होने के लिए आए थे।
इस दौरान उन्होंने किला मुबारक में माथा टेकने के बाद इसके रानी महल की जर्जर अवस्था को देख चिंता जताई व इसके रखरखाव के लिए अपने फंड में से सवा करोड़ रुपये जारी करने की घोषणा की थी।
प्रशासन के पास आए थे फंड
किला मुबारक के रानी महल के रखरखाव के लिए पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की तरफ से जारी किए सवा करोड़ रुपये जुलाई 2006 में जिला प्रशासन के पास आ गए थे।
इस संबंध में तत्कालीन डीसी राहुल भंडारी ने पुरातत्व विभाग को पत्र लिखकर उन्हें उक्त फंड जारी करने से पूर्व कुछ शर्तें रखी थी। इसमें प्रशासन ने पुरातत्व विभाग से उक्त फंडों का इस्तेमाल रानी महल पर करने व निर्धारित अवधि जिसमें उक्त फंड इस्तेमाल होने के बारे में रिपोर्ट मांगी थी।
मगर पुरातत्व विभाग चंडीगढ़ की तरफ से इस संबंध में कोई जवाब न आने से उक्त राशि पुरातत्व विभाग के खाते में ट्रांसफर नहीं हो पाई।
शूटिंग रेंज अपग्रेडिंग को ट्रांसफर किए 60 लाख
वित्त विभाग के मुताबिक मुख्यमंत्री के पैतृक गांव बादल में दशमेश सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शूटिंग रेंज को अपग्रेड करने के लिए 60 लाख रुपये ट्रांस्फर कर दिए गए। इनमें से पहले किश्त 35 लाख रुपये की जारी की गई जबकि दूसरी किश्त 25 लाख रुपये में जारी की गई।
कूका मैमोरियल ट्रस्ट को गए 50 लाख
किला मुबारक को जारी सवा करोड़ के फंड में से 60 लाख रुपये शूटिंग रेंज को ट्रांसफर करने के बाद बची शेष राशि में से 50 लाख रुपये मलेरकोटला की कूका मैमोरियल ट्रस्ट को ट्रांसफर कर दिए गए।
1964 के बाद रानी महल की नहीं हुई रिपेयर
पुरातत्व विभाग ने अंतिम बार 1964 में रानी महल की रिपेयर करवाई थी। इसके बाद इस पर एक रुपया भी खर्च नहीं किया गया।
इससे रानी महल का आधे से ज्यादा हिस्सा टूट चुका है, जो बचा है वह भी खंडहर में तबदील होता जा रहा है। मौजूदा समय में विभाग ने रानी महल की छत को लकड़ी की बल्लियों से खड़ा किया हुआ है। ऐसे में महल की छत पर लकड़ी में की हस्त कलां के नमूने भी दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। कुछ समय पहले पुरातत्व विभाग के द्वारा रानी महल का सर्वेक्षण किया गया था। लेकिन उसके बाद कोई रिपोर्ट नहीं आई और ही उसका काम ही शुरु हो पाया।
1800 साल पुराना है बठिंडा का जंगी किला
महानगर के बीचो बीच 15 एकड़ में बने इस जंगी किले के 36 बुर्ज है। मगर उचित रखरखाव के अभाव व पिछले 1800 साल के दौरान प्राकृतिक आपदाओं के चलते किले के कुछ बुर्ज को छोड़ अन्य क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। जंगी लिहाज से बनाए गए इस किले में यूं तो कुछ देखने लायक नहीं।
मगर किले के मुख्य गेट के ऊपर बने रानी महल से जुड़े ऐतिहासिक पहलू आज भी लोगों को अपने प्रति आकर्षित करते हैं। मगर जर्जर अवस्था के चलते रानी महल का अधिकांश हिस्सा टूट चुका है, और जो बचा है वह भी दिन गिन रहा है। ऐसे में अगर उक्त इमारत का रखरखाव न हुआ तो इसके आसपास बचे सैकड़ों घरों के हजारों लोगों के जीवन के लिए खतरा बन सकता है।
जयपालगढ़ को नहीं मिली फूटी कौढ़ी
बठिंडा में बसाए गए विरासती गांव जयपालगढ़ के लिए केंद्र सरकार के द्वारा 50 लाख रुपये जारी करने का एलान किया गया था लेकिन अब तक इस गांव को एक फूटी कढी भी नसीब नहीं हो पाई। इसमें पर्यटन विभाग का तर्क है कि विरासती गांव अपनी मलकियत शो नहीं कर पाया था जबकि उसी जगह में करोड़ों की लागत से खेल स्टेडियम बना दिया गया। उसमें किसकी मलकियत दिखाई गई थी।