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डाउनलोड करेंबठिंडा। सिविल अस्पताल माडर्न तरीके से वर्किंग कर सके इसके लिए सेहत विभाग ने कई हाईटेक सुविधाएं शुरू की थी मगर कुछ समय तो पॉयलट प्रोजेक्ट जोर शोर से चले लेकिन बाद में ढीले पड़ गए। अब कई प्रोजेक्ट ऑफ लाइन हो चुके हैं। इन प्रोजेक्टों पर लगा पैसा भी बर्बाद हो चुका है। विभाग आगे दौड़ पीछे छोड़ वाली कहावत पर चल रहा है। फेल हो चुके प्रोजेक्टों का सीधा असर जरूरतमंद मरीजों पर पड़ रहा है। मरीजों को मजबूरन दूर दराज जा कर अपना इलाज करवाना पड़ रहा है।
ओंकोनेट सेंटर में ऑन लाइन मिलती थी सुविधा
कैंसर रोगियों को अपना इलाज करवाने के लिए शहर से कहीं बाहर न जाना पड़े। इस के लिए विभाग ने सिविल अस्पताल में एक ओंकोनेट प्रोजेक्ट शुरु किया था। इस प्रोजेक्ट के तहत बठिंडा सिविल अस्पताल पीजीआई चंडीगढ़ व अन्य कैंसर अस्पतालों से भी जुड़ा था। ओंकोनेट प्रोजेक्ट के तहत अस्पताल के एक सर्जन को बाकायदा ट्रेनिंग भी दी थी। डाक्टर इस प्रोजेक्ट के माध्यम से पीजीआई के कैंसर विशेषज्ञों से ऑन लाइन संपर्क करते थे। मरीज भी सीधे तौर पर संबंधित डाक्टरों से बातचीत करते थे। माहिर डाक्टरों के ऑन लाइन परामर्श के बाद जरूरतमंद कैंसर मरीजों का अगला इलाज शुरु किया जाता था। इस सेंटर का मरीजों को काफी फायदा था।
हर माह 70 मरीज लेते थे ओंकोनेट का सहारा
कैंसर रोगियों के लिए ओंकोनेट प्रोजेक्ट किसी वरदान से कम नहीं था। इस सेंटर पर करीब हर माह 70 कैंसर के मरीज कैंसर डाक्टरों से कंसल्ट करते थे। इस दौरान कैंसर रोगियों की रिकार्ड भी विभाग रखता था व उनका रेगुलर
फॉलोअप भी करता था। कुछ साल चलने के बाद इस प्रोजेक्ट को बंद कर दिया गया। कैंसर के गरीब मरीजों को इससे काफी फायदा होता था। उन्हें पीजीआई के चक्कर नहीं खाने पड़ते थे। तय समय पर ही उन्हें डाक्टरी सहायता मिल जाती थी।
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