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श्री कृष्ण-रुक्मणि विवाह भक्ति का सर्वोच्च उदाहरण : पं. विजय

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - बठिंडा
बुधवार को पटेल नगर स्थित वैष्णो माता मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा आयोजन किया गया। आयोजन में कथा वाचक पंडित विजय गौड़ ने कहा कि रुक्मणि और श्रीकृष्ण का विवाह शुद्ध जीव व ईश्वर का विवाह है। यह सत्संग लौकिक विवाह का नहीं आध्यात्मिक मिलन का है। रुक्मणि परम भक्त है और भगवान श्रीकृष्ण साक्षात परमात्मा।
उन्होंने कहा कि भगवान की कथा के प्रति रुचि ही रति है। इस रति के साथ विवाहित होने से जीव प्रभु से मिलन के लिए आतुर हो जाता है। उन्होंने कहा कि स्नान केवल शरीर को शुद्ध करता है, लेकिन भगवान के कथा श्रवण से हमारा अंत:करण शुद्ध होता है।
उन्होंने कहा कि सभी कामनाओं का त्याग ही तप है। संसार की सुख दुख, भय, काम, क्रोध व अन्य सभी अवस्थाओं से मुक्ति प्राप्त कर लेने वाला मनुष्य ही तपस्वी है। वासना और स्वभाव को जीतना ही शौर्य है। और इस गति को प्राप्त कर लेने से ही हमें मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है ।पंडित विजय गौड़ ने कथा प्रवचन समागम में श्री कृष्ण का गुरुकुल प्रवेश, जरासंध से युद्ध, द्वारिकापुरी का निर्माण, रुक्मिणी का विवाह और सुदामा की कथा पर भी प्रकाश डाला। कथा प्रवचन के पश्चात उपस्थित भक्तजनों में प्रसाद वितरण भी किया गया।