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डाउनलोड करेंबठिंडा। सरकार लोगों को हाइटेक सेहत सुविधा मुहैया कराने का भले ही ढोल बजाए। पर जमीनी सच्चाई कुछ और ही है। सरकारी अस्पतालों की हालत ऐसी है कि वे राम भरोसे ही चल रही हैं। कहीं स्टाफ की कमी, तो कहीं संसाधनों का अभाव। आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना में सेहत विभाग के कई अस्पतालों की तस्वीर का खुलासा हुआ है।
उधर, सेहत मंत्री सुरजीत कुमार ज्याणी ने कहा कि सरकार एमबीबीएस डॉक्टर व स्पेशलिस्ट डाक्टरों व अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ की भर्ती कर रही है। इससे स्टाफ की कमी पूरी हो जाएगी। जिला सिविल अस्पतालों में डिजिटल एक्स-रे मशीन इंस्टाल करा दी गई है। जबकि हकीकत यह है कि जिले के कई अस्पतालों में सिटी स्कैन और एमआरआई की सुविधा ही नहीं है। एक-एक डाक्टर के सहारे अस्पताल चल रहे हैं।
बालियां वाली अस्पताल में तो रेडियोग्राफर ही नहीं है। यहां बेकार पड़ी है एक्सरे मशीन। यही है सेहत की व्यवस्था। इधर, नौजवान वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष सोनू माहेश्वरी ने कहा कि जिले के अस्पताल व हेल्थ सेंटरों के बावत आरटीआई के तहत जानकारी मांगी गई थी।
इससे पता चला कि जिले के अस्पताल राम भरोसे ही चल रहें हैं। सरकार को चाहिए कि वे अस्पताल की बुनियादी सुविधाओं की कमी को दूर करे।
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