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सीबीएसई ने स्कूलों से पूछा, कहां होती हैं स्टूडेंट्स में मारपीट की ज्यादा घटनाएं
भास्कर न्यूज - जालंधर
स्कूलों में बुलिंग यानी ताकतवर बच्चों के ग्रुप का दूसरे बच्चों को डराने धमकाने या एब्यूज लैंग्वेज का इस्तेमाल जैसी घटनाएं स्कूलों में रोकने के लिए सीबीएसई आंकड़े जुटा रहा है। इसके लिए वह देशभर के स्कूलों में ऑनलाइन सर्वे करवाया रहा है। सर्वे द्वारा जुटाए गए आंकड़ों की रिपोर्ट सीधे स्कूलों, बच्चों, प्रिंसिपलों, काउंसलर्स और टीचर्स से पूछे गए सवालों के जवाबों पर पर आधारित होंगे। मालूम हो कि सीबीएसई ने अपनी वेबसाइट पर प्रिंसिपल और स्टूडेंट्स के लिए अल अलग सर्वे फॉर्म डाले हैं, जिन्हें भरने और सीबीएसई को ऑनलाइन ही सबमिट करने के लिए कहा गया है। सीबीएसई ने यह भी कहा कि इस सर्वे फॉर्म को भरते हुए डरने की जरूरत नहीं। हर स्कूल और हर स्कूल का स्टूडेंट बेखौफ होकर कैंपस में होने वाली बुलिंग की घटनाओं के बारे में लिख सकता है। यह सर्वे फॉर्म गोपनीय रखे जाएंगे। सीबीएसई का मकसद है कि बच्चे खुल कर बताएं कि कहीं बच्चों के ग्रुप एक दूसरे को डराते -धमकाते तो नहीं।
कास्ट और धर्म के नाम पर तो नहीं होता भेदभाव - स्कूलों से यह भी पूछा गया है कि बुलिंग की समस्या स्कूलों में कितनी सीरियस है और क्या बच्चे धर्म, या कास्ट के नाम पर तो भेदभाव नहीं हो रहा। पिछले कुछ साल में एब्यूज और हरासमेंट के मामले कितने बढ़े हैं।
बुलिंग होने पर कैसे निपटते हैं स्टूडेंट्स - अगर कोई छात्र दूसरे छात्र के बारे में कोई अफवाह फैलाता है तो स्टूडेंट कैसे रिएक्ट करेगा। सीबीएसई ने पूछा कि अगर एक ताकतवर स्टूडेंट्स का ग्रुप एक कमजोर स्टूडेंट को मारता है तो कमजोर
क्या करेगा।
बुलिंग के खिलाफ क्या किया - सीबीएसई ने पूछा कि क्या आपने बुलिंग की समस्या से निपटने के लिए कोई एंटी बुलिंग कमेटी बनाई है या फिर ऐसी घटनाओं पर नजर रखने के लिए कोई सुपरविजन कमेटी है या स्टाफ को इससे निपटने के लिए कोई ट्रेनिंग दी जा रही है।
प्रिंसिपलों से पूछा मारपीट ज्यादा होती है या फिर छेडख़ानी
प्रिंसिपल , काउंसलर, टीचर के लिए दिए गए फॉर्म में सबसे पहले सीबीएसई की वेबसाइट पर जाकर उन्हें अपना नाम, स्कूल का नाम और रीजन भरना है। उसके बाद पूछे गए सवालों का जवाब देना है। सीबीएसई ने प्रिंसिपलों और टीचरों से पूछा है कि क्या आपने 2013-14 एकेडेमिक सेशन में बुलिंग की कोई घटना स्कूल में देखी। इसके आगे चार विकल्प दिए गए हैं। जिनमें मारपीट, टीजिंग, गलत नाम से पुकारना, किसी ग्रुप से बाहर निकालना, और स्टूडेंट्स के एक ग्रुप का किसी स्टूडेंट के बारे में ह्यूमर फैलाना। इसके बाद ऐसे बिहेवियर की सीरियसनेस को रेटिंग देने के लिए कहा गया है। इसके बाद पूछा गया है कि आपके स्कूल एडमिनिस्ट्रेशन के पास बुलिंग के कैसे मामले आते हैं, फिजिकल बुलिंग या वर्बल बुलिंग। यह भी पूछा गया है कि बुलिंग की घटनाएं सबसे ज्यादा कहां होती हैं। क्लासरूम में, कॉरीडोर में , लाइब्रेरी में या बाथरूम में या फिर स्कूल आते या जाते हुए या फिर रीसेस के दौरान।