छात्राओं ने छात्रों को बांधी साड़ी
भास्कर न्यूज - जालंधर
जैसे दिल शरीर की सभी आर्टरीज तक फ्रेश ब्लड पहुंचाता है उसी पंपिग प्रकिया से बरसाती पानी को स्टोर करके बिजली में बदला जा सकता है। इस आइडिया को डीएवी कॉलेज के बीएससी फस्र्ट ईयर के हर्षदीप ने वर्किंग मॉडल में तब्दील किया है।
हर्षदीप ने सोचा कि कैसे बरसाती पानी को स्टोर करने और बिजली में बदलने की प्रक्रिया को एक ही प्रोजेक्ट के जरिए प्रैक्टिकल रूप दिया जाए। उनके दिमाग में स्कूल में साइंस का वो चैप्टर याद आया, जिसमें दिल की बॉडी में ब्लड पंपिग की प्रक्रिया के बारे में बताया गया था। दिमाग लगाया और अब हर्षदीप का यह आइडिया दिमाग से कागज और अब वर्किंग मॉडल में तब्दील हो चुका है। हर्षदीप की टीम में उन्हीं की क्लास मेट्स जागृति और पूजा हैं। वहीं एपीजे स्कूल के दसवीं क्लास के तीन बच्चों अर्शनूर, रचित और युगम ने हाइब्रिड बोट बनाई है, जो कि ईंधन से नहीं बल्कि समुद्र के ही नमक वाले पानी के साथ चलती है। पहले दिन डिवीजनल कमिश्नर आर वेंकटरत्नम और डीएवी कॉलेज के प्रिंसिपल बीबी शर्मा ने इसका आगाज किया। इवेंट के दो हिस्से थे, मॉडल और पोस्टर। मॉडल में छात्रों ने ग्लोबल वार्मिंग, बायो डायवर्सिटी, रेन हार्वेस्टिंग नेचुरल डिजास्टर मैनेजमेंट, स्पेस साइंस, इन्फॉरमेशन टैक्नोलॉजी और रोबोटिक पर मॉडल पेश किए।
डीएवी कॉलेज के छात्रों के बनाए इस प्रोजेक्ट में फ्लाईओवर के पीछे बने वाटर टैंक में बरसात का पानी स्टोर होगा। वाटर टैंक में लगे इनलेट वाल्व फ्लाईओवर के नीचे लगे कंप्रेसिबल पाइप में पानी फेंकेगा। ऊपर बना फ्लाईओवर, जिसे पहले ही इस सिस्टम के हिसाब से डिजाइन किया गया है, तीन परतों, सॉलिड लेयर,, उसके ऊपर कंप्रेसिबल पाइप और उसके स्प्रिंग लगे होंगे। जैसे ही इस तीन लेयर से बने फ्लाईओवर के ऊपर से गाडिय़ां गुजरेंगी। पाइप और कंप्रेसिबल पाइप पर दबाव बनेगा। यह दबाव फ्लाईओवर के चारों कोनों में लगे पाइप के जरिए तीनों लेयर पर पड़ेगा। दबाव पडऩे से फ्लाईओवर के नीचे लगे कंप्रेसिबल पाइप में जमा पानी प्रेशर के साथ पाइप से जोड़ी गई टरबाइन पर पड़ेगा। टरबाइन पर जैसे ही प्रेशर से पानी पड़ेगा, मैकेनिकल एनर्जी प्रोड्यूस होगी। फिर साथ ही जोड़े गए डायनमो इक्विपमेंट से मैकेनिकल एनर्जी इलेक्ट्रिक एनर्जी यानी बिजली में बदलेगी। आगे डायनमो को एक एनर्जी सेवर बैटरी लगाई गई है, जिसमें बिजली जमा होगी। इस जमा बिजली से स्ट्रीट लाइटें जलाई जा सकती हैं या घरों में भी इस सिस्टम से बिजली प्रोड्यूस की जा सकती है। कंप्रेसिबल से टरबाइन तक पानी प्रेशर से पहुंचने पर यह सिस्टम वैसे ही काम करेगा, जैसे कि डैम में बिजली बनती है। इस प्रोजेक्ट का बेस हार्ट पंप होना है, जैसे कि गाडिय़ों के प्रैशर से कंप्रेसिबल पाइप दबेगी और प्रेशर से पानी आगे जाएगा, जैसे कि ब्लड धमनियों तक पहुंचता है।
आइडिया फॉर फ्यूचर - फ्लाईओवर पर गाडिय़ों के प्रेशर से पैदा की बिजली