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आशुतोष महाराज के लिए ध्यान

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - जालंधर
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के आश्रम में रोजाना की तरह अनुयायी आ रहे हैं। उन्हें सत्संग भवन के बाहर धूप में बैठाया गया है। अनुयायी बेचैन से हैं। आशुतोष महाराज की कुटिया के बाहर दूर से ही लोग साष्टांग नमन कर रहे हैं।
बुधवार तड़के से तरह-तरह की बातें फैलने लगी। दूरदराज से अनुयायी आने लगे। कपूरथला से बीजेपी नेता और ट्रांसपोर्टर श्याम सुंदर अग्रवाल अपने नौजवान बेटे के साथ आए थे। हमने महाराज
जी से दीक्षा ली है। उन्होंने
कहा - सुबह मुझे मेरे परिचित ने फोन किया। आश्रम जाने को कहा। हम यहां आए। महाराज जी के दर्शन नहीं हो पाए। यह जानकार संतोष हुआ कि वह समाधि में है। जल्द ही दर्शन देंगे।
न्यूजीलैंड के ऑकलैंड शहर में सब-वे में कार्यरत प्रतिभा गिल ने सुबह अपनी बड़ी बहन रेडियो जॉकी प्रियंका गिल को फोन कर महाराज की कुशलक्षेम पूछी। इसके बाद उनकी मां भाजपा नेता मोना गिल भी आश्रम में आई। मोना गिल ने कहा - पिछले हफ्ते ही मैं महाराज जी का आशीर्वाद लेकर गई थी। उन्हीं के आदेश से मैं पंद्रह साल पहले पब्लिक लाइफ में आई। हम चाहते हैं कि वह अपनी ध्यान समाधि अवस्था से लौटें और दुबारा हमें आशीर्वाद देने के लिए दर्शन दें।




‘ब्रह्मलीन’ की सूचनाओं का खंडन



नूरमहल आश्रम में श्रद्धालुओं से अफवाहें न उड़ाने की अपील करते सेवादार। बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस तैनात की गई है।

सैकड़ों की गिनती में आश्रम पहुंचने वाले श्रद्धालु बेचैन हैं। उनके आवास के सामने श्रद्धालु साष्टांग नमन कर रहे हैं।

जालंधर - दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रवक्ता विशालानंद ने संस्थान के संस्थापक एवं संचालक आशुतोष महाराज के ब्रह्मलीन होने की सूचनाओं का खंडन किया। उन्होंने कहा कि महाराज गहन समाधि में लीन हैं।

उन्होंने शिष्यों व अनुयायियों को भी अधिकाधिक अखंड ध्यान साधना शिविरों का आयोजन करने का आदेश दिया। कहा - समाधि की उच्च अवस्था में चेतना का उध्र्वगमन अनंत में विस्तार प्राप्त करता है। यह चेतना की स्थूल में सूक्ष्म जगत में प्रसार है, आत्मा का परम तत्व में लीन होना है, जिसके परिणामस्वरूप शरीर निष्क्रिय हो जाता है। निष्क्रियता से जड़ या कड़ी हुई देह को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान अक्सर ही मृत मान लेता है, क्योंकि समाधि की अवस्था में शरीर की क्रियाओं के रुकने से जो लक्षण उभरते हैं, उन्हें आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ‘क्लीनिकली डेथ सिमटम्स’ कहता है। गहन समाधि की दशा में शरीर की क्रियाओं के रुकने से जड़ देह में कुछ लक्षण उपस्थित हो जाते है, जिन्हें मृत्यु के लक्षण मान लिया जाता है। उन्होंने सभी साधकों से संयम बरतने और ध्यान लगाने का अनुरोध किया।