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दकोहा का बसंत मेला दो से

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - जालंधर कैंट
आई बसंत पाला उड़त, रुतों की रानी व मेलों की सरताज है बसंत। बसंत रुत का आना मौसम में तबदीली का संदेश लाती है। बसंत का त्यौहार पूरे पंजाब में मनाया जाता है।
इसी तरह निर्मल तख्त बाबा बुड्ढा जी साहिब गुरुद्वारा दकोहा में 62 वर्षों से चल रहे मेले में इस बार विभिन्न धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। 2 फरवरी से गुरुद्वारा साहिब में आयोजित होने वाले तीन दिवसीय समागम की अध्यक्षता बाबा भगवंत भजन सिंह जी करेंगे। एक फरवरी को विरसा संभाल गतका मुकाबले आयोजित होंगे। दो को गुरमति समागम होगा।
3 को संपूर्ण पाठ के भोग डाले जाएंगे। आरती व अरदास के बाद भाई जसवंत सिंह, पद्मश्री भाई निर्मल सिंह, भाई गुरइकबाल सिंह तथा भाई चमनजीत सिंह संगत को गुरु चरणों से जोड़ेंगे। बाबा भगवंत भजन सिंह जी भी प्रवचनों से संगत को निहाल करेंगे। पतंगबाजी के मुकाबले भी कराए जाएंगे। बसंत के दिन आसा दी वार के साथ भाई सतनाम सिंह उतरांचल वाले समागम का शुभारंभ करेंगे।
भाई सोहन सिंह तथा भाई बलबीर सिंह आनंदपुर वाले, भाई सतनाम सिंह उतरांचल वाले, भाई अमरजीत सिंह हजूरी रागी, भाई बलदेव सिंह गुरबाणी कीर्तन करेंगे। ज्ञानी तरसेम सिंह मोरांवाली भी कविश्री पेश करेंगे।




गतका-पतंगबाजी के होंगे आकर्षक मुकाबले

निर्मल तख्त बाबा बुड्ढा जी साहिब गुरुद्वारा दकोहा में बसंत पंचमी के उपलक्ष्य पर कराए जा रहे समागम में गतका व पतंगबाजी के मुकाबले आकर्षण का केंद्र होगे। पतंगबाजी में हर वर्ग व आयु के लोग हिस्सा लेने के लिए पहुंचते है। वहीं, पतंगबाजी के लिए सुबह से श्रद्धालु ग्राउंड में पतंग व डोर लेकर पहुंच जाते हैं।