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सिर्फ आइडिया नहीं वर्किंग आइडिया ने जीता जजों का दिमाग
जालंधर - डीएवी कॉलेज में साइंस एग्जीबिशन का आखिरी दिन जजमेंट का था। ढेरों आइडिया थे और नए भी। लेकिन जजों ने सिर्फ आइडिया नहीं बल्कि आइडिया की वर्किंग और प्रेजेंटेशन को महत्व दिया। जज की भूमिका एनआईटी की डॉ. हरलीन दहिया, सरकारी कालेज कपूरथला की मीना सेठी और एचएमवी की प्रो. दीपशिखा ने निभाई। मुख्य मेहमान पंजाब स्टेट कौंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नालॉजी चंडीगढ़ की डायरेक्टर डा. नीलम गुलाटी शर्मा, प्रिंसिपल डॉ. बीबी शर्मा ने विजेता छात्रों को पुरस्कार दिए। वाइस प्रिंसिपल प्रो. पीके शर्मा, साइंस एग्जीबिशन के को-आर्डीनेटर और फिजिक्स विभाग के मुखी प्रो. टीडी सैनी भी साथ रहे। एग्जीबिशन को सफलतापूर्वक कराने के पीछे रहे, कन्वीनर डॉ. हेमंत कुमार, डॉ. राजीव कुमार और डॉ. नवजीत शर्मा।
साइंस सिटी के लिए आठ साल में आठ बार लिखी पंजाब सरकार को चिट्ठी, जिद देखकर बादल बोले- बीबी प्रपोजल बनाकर भेजो
पंजाब स्टेट कौंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी, चंडीगढ़ की डायरेक्टर डा. नीलम गुलाटी शर्मा शहर ने 1990 में पहली बार पंजाब सरकार को पंजाब में साइंस सेंटर बनाने के लिए चिट्ठी डाली। बताती हैं, कोई जवाब नहीं आया। आठ साल में आठ बार चिट्ठी डालने के बाद 1998 में बादल साहब बोले, बीबी क्यों भेज रहे हो, चिट्ठी, इसका क्या करना है। फिर बोले शहर को साइंस सिटी दे दें तो ठीक है? मेरे लिए खुशी की ठिकाना नहीं रहा। उस समय प्रधानमंत्री गुजराल साहब थे। कलकत्ता में साइंस सिटी देखकर आए थे। सबका आइडिया मिला और कपूरथला में साइंस सिटी का प्रोजेक्ट मैंने तैयार किया। डोम थियेटर जापान से और फ्लाइट स्टीम्यूलेटर यूके से मंगवाया। इसके बाद डीजी डॉ. आरएस खंडपुर ने चार्ज संभाल लिया, साइंस सिटी में हर साल कुछ नया बन रहा है। बच्चों को खेल खेल में साइंस सिखाना इसका कारण था। लोग अपने बच्चों को डॉक्टर और इंजीनियर बना रहे हैं, साइंटिस्ट नहीं बना रहे। इसलिए मैंने केन्द्र सरकार को एक प्रोजेकट लिखा है, जिसमें बच्चो के साथ-साथ पेरेंट्स को भी साइंस में करियर ऑप्शन के प्रति अवेयर किया जाएगा। ताकि पेरेंट्स अपने बच्चों को साइंटिस्ट बनाने के बारे में भी सोचें।