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पीएयू स्टाफ का वेतन तुरंत रिलीज करे पंजाब सरकार: मनीष तिवारी
प्रमुख संवाददाता - लुधियाना
केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ((पीएयू)) के कर्मचारियों की तनख्वाह को तुरंत रिलीज किए जाने की मांग की है। उन्होंने अफसोस जाहिर किया है कि अकाली-भाजपा सरकार की लापरवाही के चलते स्टाफ को अपनी मासिक तनख्वाह के लिए संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
लुधियाना संसदीय क्षेत्र का नेतृत्व करने वाले केन्द्रीय मंत्री तिवारी ने जोर देते हुए कहा है कि राज्य की कृषि के विकास में इस संस्था के महत्वपूर्ण योगदान को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार को पीएयू के लिए फंड सुनिश्चित करने चाहिए, ताकि स्टाफ को परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि पिछले कई सालों से यह बात आम बन चुकी है कि पीएयू कर्मचारियों को वित्तीय वर्ष की आखिरी तिमाही की तनख्वाह के लिए देरी का सामना करना पड़ता है, परंतु बावजूद इसके राज्य सरकार ने इस परेशानी का हल करने के लिए कोई उपाय नहीं किया है।
तिवारी ने इन हालातों को राज्य की अकाली-भाजपा सरकार के कुप्रबंधन का नतीजा करार दिया है कि तनख्वाह रुकने के बावजूद खेतों, प्रयोगशालाओं व कक्षाओं में कार्य करने वाले वैज्ञानिकों व प्रोफेसरों को अपने अधिकार की लड़ाई के लिए धरने पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा है। मंत्री ने कहा कि जहां सभी शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थाएं बहुत महत्व रखती हैं, वहीं पर पी.ए.यू का विशेष स्थान है, जो न सिर्फ हरित क्रांति लेकर आई, बल्कि इसको कायम रखने में भी अमूल्य योगदान डाला है। अफसोसजनक है कि कृषि की आर्थिकता सुधारने संबंधी दावे करने वाली पंजाब सरकार पी.ए.यू के साथ सौतेली मां का व्यवहार अपना रही है। इस गंभीर मुद्दे पर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को व्यक्तिगत तौर पर नोटिस लेना चाहिए।
तिवारी ने भरोसा दिया है कि वह भारत सरकार के स्तर पर अपनी तरफ से हर मुमकिन कोशिश करेंगे। कुछ साल पहले भी वह केन्द्र से पी.ए.यू के लिए वन टाईम 100 करोड़ रुपए की विशेष ग्रांट लाए थे और इस बार भी कुछ अन्य ग्रांटें लाने की कोशिश करेंगे। हालांकि पीएयू सिर्फ राज्य सरकार के अधीन आती है और ऐसे में पंजाब सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह पीएयू को ग्रांटों की कमी न आने दे।