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- ‘पीपीसीबी जानबूझकर तंग कर रही इंडस्ट्रियलिस्ट्स को’
‘पीपीसीबी जानबूझकर तंग कर रही इंडस्ट्रियलिस्ट्स को’
प्रमुख संवाददाता - लुधियाना
द लुधियाना इलेक्ट्रोप्लेटर्स एसोसिएशन के प्रधान जोगिंदर कुमार ने आरोप लगाया है कि पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ((पीपीसीबी)) के अधिकारी बेवजह इलेक्ट्रोप्लेटिंग इंडस्ट्री को परेशान कर रहे हैं। इंडस्ट्रियलिस्ट्स पीपीसीबी के आदेश को लागू कर रहे हैं, लेकिन कुछ अधिकारी लगातार इंडस्ट्रियलिस्ट्स का शोषण कर रहे हैं। सरकार हमें माछीवाड़ा में अगर 100 एकड़ जमीन मुहैया करवा दे तो सभी इलेक्ट्रोप्लेटिंग इंडस्ट्री वहां शिफ्ट हो सकती है।
बुधवार को लुधियाना क्लब में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जोगिंदर कुमार ने कहा कि इलेक्ट्रोप्लेटिंग की अधिकतर इंडस्ट्री पानी साफ करवाती है। वहीं, कुछ ऐसी इंडस्ट्री है, जो न जेवीआर कंपनी से जुड़ी है और न ही उनके पास वाटर ट्रीटमेंट प्लांट है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह इंडस्ट्री विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से चल रही है। उन्होंने दावा किया कि 2009 में लुधियाना का कॉमन एफ्लुयेंट ट्रीटमेंट प्लांट ((सीईटीपी)) भारत में अव्वल माना गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी माना है कि लुधियाना के पानी में मेटल कंटेंट कम है। उकोई उद्योगपति मेटल कंटेंट का पानी सीवरेज में डालता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई में इंडस्ट्रियलिस्ट्स पीपीसीबी का साथ देंगे लेकिन बेवजह इंडस्ट्री को परेशान न किया जाए।
प्रदूषण रोकथाम के स्थायी हल के लिए जोगिंदर कुमार ने सरकार से इलेक्ट्रोप्लेटिंग इंडस्ट्री के लिए एक अलग से फोकल प्वाइंट बनाए जाने की मांग की, जिसमें ट्रीटमेंट प्लांट, रीसाइकिल यूनिट और रिकवरी एरिया बनाया जाए। उन्होंने माछीवाड़ा में सरकार की ओर से प्रस्तावित 200 एकड़ के फोकल प्वाइंट में इलेक्ट्रोप्लेटिंग इंडस्ट्री को 100 एकड़ का फोकल प्वाइंट देने की मांग की। बैठक में चंद्रप्रकाश सभ्रवाल, अशोक गुप्ता, रजिंदर गोयल, जीवन सूद, कृष्ण कुमार गुप्ता, सुरजीत सिंह और राजिंदर सिंह आदि मौजूद थे।
द लुधियाना इलेक्ट्रोप्लेटर्स एसोसिएशन ने माछीवाड़ा में मांगी 100 एकड़ जमीन