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लुधियाना से बुलाई थी डॉक्टरों की टीम

7 वर्ष पहले
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मंगलवार आधी रात में आशुतोष महाराज के असामान्य शारीरिक लक्षणों को देखकर उनके शिष्यों ने अपोलो अस्पताल लुधियाना से डॉक्टरों की टीम बुलाई थी। इसके बाद ही तमाम बातें बाहर निकलने लगीं। एक चिकित्सक ने जांच की और नाड़ी और ह्रदय गति रुकी देखकर उन्हें ‘मृत’ भी घोषित कर दिया था।




भास्कर न्यूज - जालंधर

पंजाब के प्रमुखतम आश्रमों में से एक दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, नूरमहल के संस्थापक आशुतोष महाराज की सेहत को लेकर बुधवार सुबह से तमाम तरह की सूचनाएं फैल रही हैं। टीवी चैनलों पर उनके ब्रह्मलीन होने की खबरें भी आईं। उनके भक्त ही नहीं, पुलिस प्रशासन के अफसर भी यहां आने लगे। नूरमहल में आश्रम के रास्तों पर पुलिस भी तैनात कर दी गई। मगर दोपहर बाद आश्रम के मीडिया प्रभारियों ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा डॉक्टरों ने उन्हें ‘क्लिनिकली डेड’ कहा है लेकिन वह ‘गहन समाधि’ में हैं। वह बारह साल पहले भी ऐसी समाधि में गए थे।

महाराज के ब्रह्मलीन होने की अफवाहें फैलाई जा रही हैं। सुबह से ही भक्त आने लगे। दोपहर तक जालंधर का पूरा मीडिया वहां इकट्ठा हो गया। लगभग दो बजे स्वामी विशालानंद ने आशुतोष महाराज के ब्रह्मलीन होने की खबरों का खंडन किया। उन्होंने कहा- महाराज जी ‘गहन समाधि’ में लीन हैं। इसके कारण शरीर निष्क्रिय हो जाता है। ‘जड़’ और ‘कड़ी’ हुई देह को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ‘क्लिनिकल डेथ सिंपटम्स’ कहता है। मगर समाधि में व्यक्ति चेतना के उच्च स्तरों में रमण कर रहा होता है। ‘जीवित’ होता है ‘मृत’ नहीं। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस का हवाला देकर कहा कि वह समाधि की अवस्थाओं में कई घंटों और दिनों के लिए ‘जड़’ हो जाया करते थे। ‘मृतप्राय’ हुई देह में जीवन का स्पंदन धीरे-धीरे लौटता था।शेष - पेज 2 पर



मीडिया में दिनभर रहीं अटकलें

डॉक्टर ने बताया ‘क्लिनिकली डेड’

आशुतोष महाराज ‘गहन समाधि’ में