पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • कायदे छोड़, हर दल में होर्डिंग लगाने की होड़

कायदे छोड़, हर दल में होर्डिंग लगाने की होड़

8 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
भास्कर न्यूज - फिरोजपुर
सस्ती शोहरत बटोरने के चक्कर में विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेता व वर्कर अपने बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगवा जहां सड़क हादसों को बढ़ावा दे रहे हैं, वहीं सुप्रीम कोर्ट और पंजाब सरकार के आदेशों को भी ठेंगा दिखा रहे हैं।
राजनीतिक पार्टियों के नेताओं एवं वर्करों की देखादेखी शैक्षणिक, धार्मिक एवं व्यवसायिक संस्थानों ने भी होर्डिंग्स लगवाने शुरू कर दिए हैं। फिरोजपुर सिटी एवं कैंट का शायद ही कोई ऐसा चौक या सड़क बची हो जहां होर्डिंग्स की भरमार न हो। करीब एक माह पहले जलालाबाद में एक समारोह के दौरान डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल ने कहा था कि सड़कों किनारे अवैध तरीके से होर्डिंग्स बोर्ड लगाने व लगवाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, लेकिन आज तक इस मामले में किसी पर कार्रवाई होते नहीं देखी गई। राज्य के लगभग प्रत्येक जिला मजिस्ट्रेट द्वारा सरकारी भूमि, चौक-चौराहों, सड़कों पर होर्डिंग बोर्ड लगाने पर धारा 144 के तहत पाबंदी लगाई गई है, लेकिन कहीं पर भी इस पाबंदी का असर नहीं देखा जा रहा।
दैनिक भास्कर की ओर से 9 जनवरी के अंक में होर्डिंग्स बोर्ड के मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था, लेकिन फिरोजपुर जिला प्रशासन भी इस मामले पर चुप्पी साधे बैठा है।
अपने स्वार्थ के लिए चौक-चौराहों, सड़क किनारों एवं दीवारों पर होर्डिंग लगा हजारों वाहन चालकों की जान जोखिम में डालना कहां तक उचित है? इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए भास्कर की ओर से कई राजनीतिक पार्टियों के प्रमुखों से बात की गई तो सभी ने एक सुर में इतनी हामी अवश्य भरी कि होर्डिंग्स बोर्ड का चलन वाकई वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। इसका समाधान क्या है, इस बारे में कोई भी तसल्लीबख्श जवाब नहीं दे पाया।
सुप्रीम कोर्ट के द्दस्ड्ड आदेश : देश की सर्वोच्च अदालत ने 20 नवंबर 1997 को एमसी मेहता वर्सेज यूनियन ऑफ इंडिया पर आधारित सिविल रिट पिटिशन पर सुनवाई करते हुए स्थानीय प्रशासकों, रेलवे, पुलिस एवं परिवहन विभाग को आदेश दिए थे कि रोड साइड लगे उन होर्डिंग बोर्डों की पहचान कर उन्हें हटाया जाए, जो खतरनाक साबित हो रहे हैं और ट्रैफिक में बाधा डालते हैं। बोर्डों को हटाने के साथ-साथ रोड/ट्रैफिक साइन बोर्ड लगाए जाएं ताकि ट्रैफिक को सुचारू ढंग से चलाया जा सके। समय के अंतराल के साथ इन निर्देशों में कुछ तब्दीलियां होती रही, लेकिन मूल भावना वाहन चालकों की सैफ्टी रही।