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24 से 28 सप्ताह की गर्भ अवस्था में जरूर चेक करवाए शूगर

8 वर्ष पहले
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फिरोजपुर - सेहत विभाग की ओर से महिलाओं में गर्भ अवस्था के दौरान शूगर बढऩे के कारणों से विभाग के साथ जुड़ीं एएनएम व आशा वर्करों को अवगत करवाने के लिए कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर फिरोजशाह और कस्सोआना में ट्रेनिंग वर्कशॉप आयोजित की गईं। दोनों वर्कशॉप में विभाग की विशेषज्ञ डॉ. जीतू सिंह, डिप्टी मास मीडिया अधिकारी लिली राना ने बताया कि गर्भ अवस्था से पहले महिलाओं को शूगर नहीं होती। पर गर्भ धारण करने के साथ ही हारमोन में तबदीली के कारण रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है और महिलाएं शूगर की शिकार हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि गर्भ के दौरान हुई शुगर अस्थाई होती है और बच्चे के जन्म के बाद अपने आप ठीक हो जाती है, फिर भी इसकी निरंतर जांच करवानी आवश्यक है। डॉ. सिंह ने बताया कि 24 से 28 सप्ताह की गर्भ अवस्था में शूगर लेवल की जांच करवानी अत्यावश्यक है, क्योंकि इस समय पर शूगर लेवल की रिपोर्ट बिल्कुल सही प्राप्त होती है। गर्भ अवस्था के दौरान शूगर का उपचार सिर्फ इंसुलीन है। वर्कशॉप में एसएमओ डॉ. अजय कुमार, डॉ. भगत, डॉ. अरूण दत्ता, विक्रम इत्यादि शामिल हुए।



वर्कशॉप को संबोधित करती डॉ. जीतू सिंह।