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पुलिस वालों की गोली से हुई मौत, सीएफएसएल रिपोर्ट में पुष्टि

7 वर्ष पहले
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विभागीय कार्रवाई के लिए सरकार को दो माह का समय

ललित कुमार. चंडीगढ़

गुरदासपुर में पुलिस की फायरिंग में ही एक सिख युवक की मौत हुई थी। सोमवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष सीएफएसएल की रिपोर्ट में इस आशय की पुष्टि हो गई। चीफ जस्टिस संजय किशन कौल व जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ ने इस पर जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई के लिए दो माह का समय दिया है। घटना की जांच के लिए गठित स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम ((एसआईटी)) को हाईकोर्ट ने छह सप्ताह का समय देते हुए फाइनल रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने 7 अप्रैल के लिए मामले पर अगली सुनवाई तय की है।

स्वयं सेवी संस्था लायर्स फॉर हयूमन राइटस इंटरनेशनल की तरफ से दाखिल याचिका में कहा गया कि 29 मार्च 2012 को शिव सैनिकों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर कुछ सिख युवक गुरुद्वारा रामगढिय़ा के बाहर सड़क पर बैठे थे। एक दिन पहले ही पंजाब के तात्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी बलवंत सिंह राजोआणा की फांसी पर रोक की मांग को लेकर सिख युवकों के साथ शिव सेना कार्यकर्ताओं ने मारपीट की थी। पुलिस ने पहले तो हवा में फायर किए लेकिन बाद मे इन युवकों पर गोलियां चला दी। 19 वर्षीय जसपाल सिंह को एक गोली लगी और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

इसके अलावा एक अन्य व्यक्ति रणजीत सिंह को भी गोली लगी और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। जसपाल के परिजनों की शिकायत पर एफआईआर तो दर्ज कर ली गई लेकिन आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई। याचिका में मांग की गई कि मामले में मृतक व घायल के परिवार को मुआवजा दिलाया जाए और मामले की सीबीआई जांच कराई जाए।