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आलोचना करने वालों को अपने काम से चुप कराइए
पहली कहानी: महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग में कटहल पांच या छह रुपए किलो के हिसाब से बिकता था। कई बार तो किसानों को सीजन के दौरान इस फसल को यूं ही फेंकना पड़ता था। क्योंकि इसे खरीदने वाला कोई नहीं होता था। ऐसे में ल्यूपिन कंपनी के ह्यूमन वेलफेयर एंड रिसर्च फाउंडेशन ने किसानों की मदद की। उन्हें कटहल का अचार बनाना सिखाया। लड्डू और चॉकलेट बनाना भी। शुरू-शुरू में महिलाओं में इस कोशिश को लेकर बहुत उत्साह नहीं था। कई लोग इसे बेकार की मशक्कत भी कह रहे थे। लेकिन ल्यूपिन फाउंडेशन के सदस्यों को अपनी पहल पर यकीन था। उन्होंने महिलाओं को इस काम में हिस्सेदारी के लिए प्रोत्साहित किया। कुछेक को जरूरत पडऩे पर लोन भी दिया।
और कुछ साल बाद...। भगवान गणेश को चढ़ाने के लिए कटहल का मोदक ((लड्डू)) सबसे ज्यादा और पसंदीदा उत्पाद बन गया। इसकी दो वजहें थीं। एक-यह साल भर तक खराब नहीं होता। दूसरी-इसमें प्रोटीन और कैल्शियम खूब पाया जाता है। इसी तरह राजस्थान में भरतपुर के भूसावर कस्बे में करीब 25 इकाइयां चल रही हैं। यहां किसान से उद्यमी बने लोग आम, हरी मिर्च, गोभी, करेला आदि का अचार बनाते हैं। करीब 35 किस्म का अचार बनाया जाता है। इसके अलावा करोंदे और आंवले की चटनी और मुरब्बा भी। सभी इकाइयों को कुल उत्पादन करीब 800 क्विंटल है। यहां से तैयार उत्पादों को राजस्थान ही देश के कई छोटे-बड़े शहरों में भेजा जाता है।
दूसरी कहानी: उन्होंने हाल में ही 20,000 स्टूडेंट्स को योगा सिखाकर विश्व रिकॉर्ड बनाने की कोशिश की है। तमिलनाडु के कोयंबटूर में उनका ट्रेनिंग कैंप है। उनके स्टूडेंट्स में छह से 60 साल तक की उम्र के लोग हैं। इस मध्यमवर्गीय महिला ने पहले युवा माताओं को योग की ट्रेनिंग देना शुरू की थी। ताकि उनके शरीर लचीले बने रहें। खुद नौ गज की लंबी साड़ी पहनकर ट्रेनिंग देती थीं। लोग उन पर हंसते थे। लेकिन उन्होंने किसी की परवाह नहीं की। कुशल जिम्नास्ट की तरह जब उन्होंने शरीर को रबर की तरह मोड़ते हुए योगासन दिखाए-सिखाए तब लोगों ने उन्हें गंभीरता से लेना शुरू किया। वे सबसे मुश्किल मयूरासन भी सहजता से कर लेती हैं। इसमें हाथों के बल पर पूरा शरीर पेट के बल लेटा होता है।
कोई कह सकता है कि कुशल योग प्रशिक्षक के लिए मयूरासन करना कौन सी बड़ी बात है? लेकिन उनके लिए तो बड़ी बात ही है। क्योंकि वे 93 साल की उम्र पूरी कर चुकी हैं। दुनिया में शायद वे सबसे ज्यादा उम्र की योग शिक्षक हैं। उनका नाम है वी. नानम्मल। जब वे 10 साल की थीं, तब से योग कर रही हैं। आज इतनी उम्र के बाद भी उन्हें स्वास्थ्य से जुड़ी कोई समस्या नहीं है। इसका पूरा श्रेय वे योग को देती हैं। परदादी हो चुकी हैं। लेकिन आज तक कभी अस्पताल नहीं गईं। रोज सुबह 4.30 बजे उठती हैं। पूरे 83 साल हो गए, उन्होंने जब से योगाभ्यास शुरू किया। आज तक एक भी दिन ऐसा नहीं गया जब उन्होंने उसे छोड़ा हो।
तीसरी कहानी: अमेरिका में कर्नल जॉर्ज वाशिंगटन गोएथल्स की बहुत आलोचना हुई, जब उन्होंने पनामा नहर के निर्माण का काम हाथ में लिया। खराब भौगोलिक स्थितियां। उससे भी खराब मौसम। कई कामगार तो बीमार ही पड़ गए। कई बीच में ही काम छोड़कर भाग। आलोचक कह रहे थे कि यह काम कभी पूरा नहीं हो पाएगा। लेकिन उन्होंने पक्का इरादा कर रखा था। काम बंद नहीं किया। उनसे उस दौरान जब भी पूछा जाता कि क्या आप अपने आलोचकों को जवाब नहीं देंगे। तो वे कहते, ‘जरूर दूंगा। लेकिन सही वक्त आने पर।’ लोग पूछते, ‘कैसे।’ वे कहते, ‘इस नहर का काम पूरा करके।’ और 15 अगस्त 1914 को पनामा नहर तैयार हो गई। उनके आलोचकों का खुद ही मुंह बंद हो गया।
ह्म्ड्डद्दद्धह्वञ्चस्रड्डद्बठ्ठद्बद्मड्ढद्धड्डह्यद्मड्डह्म्द्दह्म्शह्वश्च.ष्शद्व
फंडा यह है कि
अपने काम से समाज को जवाब दीजिए। खासकर तब जबकि किसी नई पहल के लिए आप पर सवाल खड़े किए जाएं। और आपकी आलोचना की जाए।
मैनेजमेंट फंडा
एन. रघुरामन