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गुरु रविदास आयुर्वेद यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. ओम प्रकाश उपाध्याय को वर्ष 2014 में पद्मश्री अवार्ड देने की घोषणा की गई है। घोषणा 2५ जनवरी को गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले की गई। उन्हें यह सम्मान मेडिसिन ((आयुर्वेद)) के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए जल्द राष्ट्रपति की ओर से दिया जाएगा।
डॉ. उपाध्याय मूल रूप से राजस्थान के जिला भीलवाड़ा के छोटे से गांव मांडल के रहने वाले हैं। डॉ. उपाध्याय की पत्नी भंवरी देवी हाउस वाइफ हैं, जबकि बड़े बेटे डॉ. आलोक उपाध्याय जयपुर मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं और छोटे बेटे अभिषेक अपोलो ग्रुप की कंपनी में जीएम पद पर तैनात हैं।
नाड़ी देखकर करते हैं उपचार
डॉ. ओम प्रकाश उपाध्याय 4 जुलाई 2011 को आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार संभालने से पहले नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद जयपुर में बतौर प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष नियुक्त थे। प्रो. उपाध्याय विख्यात नाड़ी वैद्य हैं और आज भी वह आयुर्वेद विश्वविद्यालय, होशियारपुर में अपने कक्ष में रोगियों की नाड़ी देखकर रोगों को निदान करते हैं। आयुर्वेद चिकित्सा संबंधी परामर्श देते हैं। उन्होंने 35 वर्ष तक आयुर्वेद चिकित्सा व शिक्षा के क्षेत्र में काम किया है। अंग्रेजी, हिंदी व संस्कृत भाषाओं में आयुर्वेद चिकित्सा पर कई पुस्तकें लिखी हैं। उन्हें संस्कृत व आयुर्वेद के क्षेत्र में कई राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार प्राप्त किए हैं।
संस्कृत के विद्वान भी हैं
डॉ. ओम प्रकाश उपाध्याय ने 1966 में उदयपुर से मैट्रिक पास की। इसके उपरांत उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से वर्ष 1970 में पहले शास्त्री व बाद में आयुर्वेदाचार्य की डिग्री हासिल की। वर्ष 1973 व 1974 में उन्होंने उदयपुर यूनिवर्सिटी से एमए करने के उपरांत 1986 में राजस्थान यूनिवर्सिटी से पहले एमडी की व 1988 में पीएचडी की। डॉ. उपाध्याय ने आयुर्वेद में एमडी व पीएचडी करने के
अतिरिक्त संस्कृत भाषा में एमए, व्याकरणाचार्य और दर्शनाचार्य की उच्च उपाधियां प्राप्त की हैं। वह संस्कृत के विद्वान हैं व संस्कृत के विकास के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहते हैं।
डॉ. ओम प्रकाश उपाध्याय, वीसी
कर्म का फल देर से ही सही पर मिलता जरूर है
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