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‘बुजुर्ग’ शब्द से नफरत, आज भी बंदूक थामने को तैयार हैं ये जवान
भास्कर न्यूज - होशियारपुर
सेना की नौकरी के दौरान जहां देश की सरहदों की रक्षा करता था वहीं अब रिटायरमेंट के बाद घर में बैठना अच्छा नहीं लगता। रिटायरमेंट के बाद सरकार की तरफ से कोई नौकरी भी नहीं मिली। बस पेंशन मिल रही है। हमें दुख है कि सरकार ने अभी तक सही मायने में वन रैंक वन पेंशन स्कीम को लागू नहीं किया है, जिसकी वजह से अब जो सैनिक रिटायर हो घर लौट रहे हैं वे हमसे ज्यादा पेंशन पाते हैं। हमने 1962 के साथ-साथ 1968, 1971 के अलावा कारगिल की लड़ाइयां भी लड़ीं पर हमारे दुख दर्द को सुनने वाला कोई नहीं है। यह दुख भरी दास्तां जिले के पूर्व सैनिकों ने रविवार को पुलिस लाइंस में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान विशेष बातचीत में सुनाई।
बीस साल से परेड में भाग लेना नहीं भूलते हैं बुजुर्ग सैनिक
होशियारपुर जिले को इस बात पर गर्व है कि देश की सेना में आज भी सबसे अधिक सेना इसी जिले से संबंधित है। वहीं देश में सबसे ज्यादा रिटायर्ड फौजी भी होशियारपुर में ही है। सरकार ने होशियारपुर में इनकी सेहत सुविधाओं को ध्यान में रख ईसीएचएस ((एक्स सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ सिस्टम)) अस्पताल के साथ-साथ जनौड़ी ढोलवाहा में स्मारक का भी निर्माण किया है। रिटायरमेंट के बाद अपने को बुजुर्ग शब्द से नफरत करने वाले सभी पूर्व फौजियों ने कहा सरकार अभी भी हाथ में बंदूकें थमा दे तो सरहदों पर दुश्मनों को दिन में भी तारे दिखा सकते हैं। फिर हम बुजुर्ग कैसे हुए। खाली घर में समय नहीं गुजरता है तो हमने 1995 में निर्णय लिया कि जनौड़ी व अतवारापुर के सभी पूर्व फौजी स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस पर हम भी परेड में भाग लेंगे जिसे हम आजतक निभाते चले आ रहे हैं।
शराब का कोटा कम होने से परेशान
पूर्व सैनिकों कैप्टन गुरदेव सिंह, गुरमेल सिंह, मदनलाल, जीवनलाल, मेजर जसपाल सिंह, विजय कुमार, दलवीर सिंह, दर्शन सिंह, संजीवनलाल, सूबेदार जीत सिंह, नरिन्दर सिंह, कुलदीप सिंह, जरनैल सिंह, अमरीका सिंह, प्यारा सिंह व सुखबीर सिंह ने बताया कि नौकरी के दौरान हमें सेना की तरफ से अफसर रैंक के लिए 16 बोतल की जगह अब 10, जेसीओ के लिए 10 बोतल की जगह 6 और अन्य पदों के लिए 8 बोतल की जगह सिर्फ 4 बोतल का कोटा फिक्स कर दिया गया है। रिटायरमेंट के बाद घर बैठने पर इसकी तलब ज्यादा होती है पर सरकार ने कोटा कम कर दिया है।
खरीदनी पड़ती हमें महंगी दवा
पूर्व सैनिकों का कहना है कि सरकार ने होशियारपुर में हमारे लिए ईसीएचएस अस्पताल की सुविधा तो बहाल कर दी है पर उसमें कोई स्पेशलिस्ट डाक्टर नहीं है। यहां से रैफर होकर हम सिविल अस्पताल में तो जाते हैं पर वहां लिखी दवाइयां हमें महंगे दाम पर बाजार से खरीदने को मजबूर होना पड़ता है। यही नहीं कैंटिन में हमें खुद सामान लेने आना पड़ता है। कई बार जब हम बीमार होते हैं तो कैंटिन से हमारे बच्चों को सामान नहीं दिया जाता। सरकार को हमारी इस कठिनाइयों को समझना चाहिए।
फोटो नं- 4 या 5