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डार्क जोन : गिरते भू-जलस्तर के मुद्दे पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पंजाब सरकार को जारी किया नोटिस
भास्कर न्यूज - होशियारपुर
होशियारपुर के छोटे से गांव दौलतपुर गिल्लां के रहने वाले व इस समय मुंबई में अपना बिजनेस संभाल रहे पीके राणा की याचिका पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल नई दिल्ली ने पंजाब सरकार को गिरते भू जलस्तर पर के मुद्दे पर नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी।
मंगलवार को ट्रिब्यूनल की तरफ से जारी नोटिस दिखाते हुए एनजीओ संस्था सफल भारत गुरु परंपरा के चेयरमैन पीके राणा ने बताया कि पंजाब में गिरते भू-जलस्तर की असली वजह यहां पर बेइंतहा पानी के दोहन के साथ-साथ अत्यधिक मात्रा में सफेदे के पेड़ लगाना है। यही नहीं स्वयं सेन्ट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड ने भी साल 2012 में पंजाब सरकार को चेताया था कि पंजाब में फ्री बिजली मिलने की वजह से किसान अत्यधिक मात्रा में सफेदे के पेड़ लगा रहे हैं, जिस वजह से पंजाब के 137 जोन में से 100 से अधिक जोन डार्क जोन में आ गया है। 27 जोन ऐसे भी है जहां युद्घस्तर पर पानी का दोहन हो रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल दिल्ली की तरफ से याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब सरकार के चीफ सेक्रेटरी, प्रिंसिपल सेक्रेटरी ((कृषि)), सचिव कृषि विभाग, वाटर रिसोर्स विभाग के चीफ इंजीनियर, पावरकाम के सेक्रेटरी के साथ-साथ सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी को नोटिस जारी किया गया है।
पीके राणा।
सफेदे के पेड़ों पर रोक लगाई जाए
गांव के नल में नहीं मिला था पानी
राणा ने बताया कि कुछ समय पहले जब वह अपने पैतृक गांव दौलतपुर गिल्ला गया तो वहां नलके से पानी नहीं निकल रहा था। जब मैकेनिक को बुलाया तो बताया कि आपको डीप बोर करवाना पड़ेगा क्योंकि पानी का लेवल सौ फुट से भी नीचे चला गया है। जब इस संबंध में जानकारियां जुटाई तो चौकाने वाले नतीजे मिले। हमें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का वह शब्द याद आ गया कि अगला विश्वयुद्घ जब भी होगा वह पानी के लिए ही होगा। बस उसी समय ठान लिया कि वह गिरते भू जलस्तर के लिए संघर्ष करेंगे।
राणा ने बताया कि एक सफेदे का पेड़ एक दिन में 80 गैलन पानी ले लेता है। यही नहीं जमीन के सौ फुट नीचे तक के पानी को यह पेड़ बड़े ही आसानी से सोख लेता है। राणा ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि स्वयं राज्य के सिचाई मंत्री जेएस सेखों कहते हैं कि राज्य के 85 फीसदी हिस्सों में पानी जमीन के नीचे से बड़े ही तेजी से गायब हो रहा है। यही नहीं सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि पांच दरियाओं से घिरे पंजाब में 38 साल बाद पानी के लिए हाहाकार मच सकती है। एक तरफ राज्य में पानी का अत्यधिक दोहन हो रहा है वहीं सरकार दूसरी तरफ से थोक के भाव में नए-नए डीप बोर वाले ट्यूबवेल लगवा रही है जिसपर रोक लगनी चाहिए। साथ ही सफेदे के पेड़ लगाने पर भी रोक लगाई जाए।