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मेन ड्रेन की नए तरीके से सफाई बरसात में नहीं होगा जलभराव
राणा रणधीर - पटियाला
हर साल बरसात में जल निकासी में सबसे बड़ी परेशानी का सबब बनने वाली मेन ड्रेन ((कवर्ड नाला)) की सफाई के लिए इन दिनों नाभा गेट पर एक एक्सपेरिमेंट किया जा रहा है।
नगर निगम के वाटर सप्लाई व सीवर ब्रांच के एसडीओ सुरेश कुमार इस एक्सपेरिमेंट को कर रहे हैं। पहली बार मेन ड्रेन ((नाभा गेट से भाषा विभाग तक)) को बंद करके उसके पानी को सब ड्रेनों ((मेन ड्रेन के पैरलल चल रहीं दोनो छोटी ड्रेन)) में गिरा दिया है। मेन ड्रेन से तेज गति से पानी आने से सब ड्रेन भी चलने लगी हैं। मेन ड्रेन खाली होने से उसकी सिल्ट ((जमा गोबर व गंदगी)) को आसानी से बाहर निकाला जा रहा है। फिलहाल यह एक्सपेरिमेंट लगभग 1 हजार फीट लंबाई में हो रहा है। उसके बाद इसे पूरी मेन ड्रेन ((लगभग 3 किलोमीटर तक)) पर लागू किया जाएगा।
इस तरह से कर रहे सफाई
सीवर के पानी में गोबर व कचरा बहकर आता है। दोनों सब ड्रेन भी जाम हो गई थीं। मेन ड्रेन का पानी इनमें आने से दोनों सब ड्रेन चलने लगी हैं। बंद मेन ड्रेन की सफाई मजदूर को अंदर उतार कर की जा रही है। नाभा गेट से भाषा विभाग तक लगभग एक हजार फीट एरिया बनता है। एक बार में मुख्य ड्रेन लगभग 200 फीट तक ही बंद की जा सकती है। यह सफाई 5 चरणों में पूरी होगी।
१ हजार फीट पर हो रहा प्रयोग, सफल होने पर तीन किमी ड्रेन की होगी सफाई
मेन ड्रेन लाहौरी गेट ((पूजा स्वीट्स के सामने से)), टीबी अस्पताल के सामने, भाषा विभाग, नाभा गेट, चांदनी चौक, एसी मार्केट की बैक साइड, सब्जी मंडी, काले मुंह वाली बागीची, केसर बाग, शीश महल के पास बड़ी नदी में गिरता है।
नाभा गेट से भाषा विभाग तक मेन ड्रेन को बंद करके उसका पानी दोनों तरफ पैरलल चल रही सब ड्रेनों में गिराया, अब पानी ज्यादा आने से जाम हो चुकी सब ड्रेन भी चलने लगीं
३ ञ्चनए एक्सपेरिमेंट में निगम ने मेन ड्रेन को बोरियां की मदद से 200 फीट तक बंद कर दिया। इससे मेन ड्रेन का पानी दोनों सब ड्रेनों में चला गया। २०० फीट के हिस्से की सफाई की जा रही है।
1 व २ ञ्चयह नाला २००७ में बना था। कवर्ड नाले के नीचे तीन तरह की लेयर हैं। मेन ड्रेन के दोनों तरफ सब ड्रेन है। राइट सब ड्रेन में शहर के अंदरूनी इलाकों ((पुराना शहर)) का सीवर व बरसाती पानी गिरता है। लेफ्ट ड्रेन में बाहरी इलाकों ((फव्वारा चौक से लीला भवन वाले इलाके)) का। आम दिनों में दोनों सब ड्रेन चलती हैं। मुख्य ड्रेन बंद रहती है।
2007 में कवर हुआ था नाला
॥2007 में नाले को कवर कर दिया गया था। उसके बाद से ही नाले की सफाई को लेकर सवाल उठते रहे हैं। निगम के मुताबिक नाला कवर करते समय सफाई की कोई व्यवस्था नहीं रखी गई है। शहर के सीवर में पशुओं का गोबर आने से यह नाला जाम हो चुका है।
पानी रोककर सुखाकर की जा रही सफाई: एसडीओ
॥ शहर में जब से सीवर लाइन बिछाई गई है तब से आज तक मेन ड्रेन का पानी रोककर उसे सुखाकर इस तरह सफाई कभी नहीं की गई। काफी समय से प्रोजेक्ट पर काम कर रहा था कि इस समस्या को जड़ से कैसे खत्म किया जाए। फिर यह आइडिया आया। अब नया तजुर्बा कर रहा हूं। पहले चरण में बेहतर रिजल्ट सामने आए हैं। अगर इस साल बरसात से पहले-पहले पूरी मेन ड्रेन की सफाई इस तरीके से कर पाए तो इस बार शहर में जल भराव नहीं होगा। शहर का जाम सीवर भी खुल सकेगा।ञ्जञ्ज
सुरेश कुमार, एसडीओ, वाटर सप्लाई व सीवरेज ब्रांच
बरसाती दिनों में पानी ज्यादा आने से तीनों लेयर ((मुख्य व दोनों सब ड्रेन)) में वाटर फ्लो का लेवल एक होता है। मानसून से पहले अब तक सिर्फ मेन ड्रेन की सफाई होती रही है। मेन ड्रेन 2007 में कवर कर दी गई थी। सफाई के लिए कोई होल नहीं छोड़ा गया, इसलिए मेन ड्रेन की सफाई आधी अधूरी होती रही है। हर साल मानसून में शहर में जल निकासी नहीं हो पाती और थोड़ी सी बरसात में कई जगह ओवरफ्लो हो जाता है।
कुछ यूं समझिए इस नए तजुर्बे को