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इलेक्ट्रानिक बिलोरीविन मशीन से बिना ब्लड निकाले पता चलेगा बच्चों में पीलिया

8 वर्ष पहले
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सोबन गुसांई - पटियाला
राजिंदरा अस्पताल में अब बच्चों में पीलिया का चेकअप करने के लिए उनका ब्लड नहीं निकालना पड़ेगा। इसके लिए अस्पताल में इलेक्ट्रानिक बिलोरीविन मशीन लगाई जाएगी।
राज्य सरकार ने सरकारी राजिंदरा अस्पताल में बच्चा व गायनी विभाग को मॉडर्न बनाने का प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसके तहत इन विभागों को अपग्रेड करने के लिए 15 करोड़ रुपए सेंक्शन किए गए हैं। ग्रांट से जल्द पंजाब हेल्थ सिस्टम कार्पोरेशन ((पीएचएससी)) 8 मंजिल बिल्डिंग बनाएगा। इसमें मॉडर्नं मशीनें भी होंगी। चार मंजिल में बच्चा विभाग जबकि चार में गायनी विभाग होगा।




बच्चों की डेथ रेट घटाने की योजना

॥ प्रपोजल तैयार करने वाले बच्चा विभाग के प्रोफेसर डॉ. जसबीर सिंह ने बताया कि एक साल तक के बच्चों की डेथ रेट घटाने के लिए मैटरनल चाइल्ड एंड हेल्थ केयर ने प्रोजेक्ट बनाया है। 15 करोड़ विभाग को मिले हैं। इससे आठ मंजिला बिल्डिंग व आधुनिक मशीन मंगवाई जा रही हैं। जिससे किसी भी कंडीशन में बच्चे को रैफर न करना पड़े।

बच्चा विभाग में यह आएंगी मशीनें

॥वेंटिलेटर: उन बच्चों को रखा जाता है, जिनकी हालत गंभीर हो। बच्चे को सांस व दिल से संबंधित समस्या है तो उसके लिए वेंटिलेटर जरूरी होता है। राजिंदरा अस्पताल में बच्चों का वेंटिलेटर नहीं है।

॥इंफ्यूजन पंप: बच्चा मुंह से दवा लेने के असमर्थ है, तो उसे इंफ्यूजन पंप से मल्टीपल दवा दी जाती हैं। इंफ्यूजन पंप से खून चढ़ाने की सुविधा होती है। जिससे बच्चे को अधिक दर्द न हो।

॥इलेक्ट्रानिक वेइंग मशीन: बीमार बच्चा धीरे ग्रोथ करता है। अब तक बच्चे का वजन 100 ग्राम के हिसाब से मापा जा सकता था। इस मशीन से प्रति ग्राम में वजन नापा जा सकेगा।

॥इलेक्ट्रानिक बिलोरीविन: बच्चों में पीलिया का पता करने के लिए पहले खून निकलना पड़ता है। अब इस मशीन से बिना खून निकाले पीलिया का पता लगाया जा सकेगा। मशीन ब्लड प्रेशर मशीन की तरह काम करती है।

॥अपोनिया मॉनिटर सी पैप: किसी बच्चे की अचानक सांस रुक जाए तो अपोनिया मॉनिटर से अप्राकृतिक ढंग से सांस दिलाई जा सकती है। बच्चे को रिस्टोर करने के लिए अपोनिया मॉनिटर जरूरी है।

एक ही बिल्डिंग में होगा इलाज

॥ बिल्डिंग बनने पर इसी में नवजात व दूसरे बच्चों का इलाज होगा। बिल्डिंग में ओपीडी, वार्ड, थिएटर, आईसीयू, निकू, पिकू तथा क्लास रूम होंगे। पुरानी बिल्डिंग का रेनोवेशन करके इसमें वार्ड बनाए जाएंगे। सरकार से पहले ही 1 साल के तक बच्चों इलाज व ट्रांसपोर्ट खर्चा पूरी तरह निशुल्क हैं। मेडिकल कॉलेज पटियाला के अलावा फरीदकोट को 15 और अमृतसर को 2.5 करोड़ रुपए की ग्रांट जारी हुई है।

फंड मिला, जल्द काम शुरू: प्रिंसिपल

॥ मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. केडी सिंह ने बताया कि 15 करोड़ रुपए की लागत से बनने जा रही गायनी व बच्चा वार्ड की बिल्डिंग का फाइनल अप्रूवल देने के लिए पीजीआई व पीएचएससी की एक्सपर्ट टीम आई थी। ड्राइंग में सुधार के सुझाव दिए हैं। चीफ सेक्रेटरी की फाइनल अप्रूवल मिलने के बाद निर्माण शुरू होगा।

मेडिकल कॉलेज के बच्चा व गायनी विभाग के प्रपोजल के बाद बुधवार को मैटरनल चाइल्ड एंड हेल्थ केयर ((एमसीएच)) चंडीगढ़ की टीम मेडिकल कॉलेज पहुंची। पीजीआई बच्चा विभाग के प्रोफेसर व टेक्निकल एक्सपर्ट डॉ. सुरजीत सिंह तथा पीएचएससी के इंजीनियर की देखरेख में 18 एक्सपर्ट की टीम ने बच्चा वार्ड का दौरा किया। टीम ने बिल्डिंग में मॉडिफाई किया है। चीफ सेक्रेटरी की अप्रूवल के बाद काम शुरू होगा। मीटिंग में टीम सहित प्रिंसिपल डॉ. केडी सिंह, बच्चा विभाग के हेड डॉ. केके लोचम तथा गायनी विभाग की हेड डॉ. मंजीत कौर मोही मौजूद रहीं।

चीफ सेक्रेटरी की अप्रूवल के बाद शुरू होगा निर्माण