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फंड न मिलने से ठेकेदार ने बंद किया हॉस्टल बनाने का काम

8 वर्ष पहले
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सोबन गुसांई - पटियाला
2014 व 15 सेशन में मेडिकल कॉलेज पटियाला व अमृतसर में बढऩे जा रही पोस्ट ग्रेजुएट व एमबीबीएस सीटों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी सामने आ सकती है। मेडिकल कॉलेज में स्टूडेंट्स के लिए बनने जा रहे होस्टल का काम फंड के अभाव से बंद हो गया है। विभाग ने ठेकेदार को फंड जारी नहीं किया, जिस कारण ठेकेदार ने काम बंद कर दिया है। करीब 2 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहे हॉस्टल में करीब 160 कमरे बनने हैं, जो तीन मंजिला बिल्डिंग है।
ठेकेदार अब तक करीब 50 लाख रुपए के काम करा चुका है, लेकिन मेडिकल शिक्षा व खोज विभाग ने ठेकेदार को फंड जारी नहीं किए। इन हालातों में ठेकेदार ने काम करना ही बंद कर दिया है। बिल्डिंग का निर्माण अभी एक ही मंजिल तक पहुंच पाया है। इससे पहले विजिलेंस ने बिल्डिंग मैटीरियल की जांच के लिए सैंपल लिए थे, जिस कारण कुछ समय तक काम रुक गया था।
मेडिकल शिक्षा व खोज विभाग की ओर से मेडिकल कॉलेज में सीटों की बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार को लिखा है। सीटें बढ़ाने को
लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर व फैकल्टी का होना जरूरी है। दोनों चीजों को जांचने के लिए मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया ((एमसीआई)) की टीम किसी भी समय मेडिकल कॉलेज पहुंच सकती है।
कॉलेज में हॉस्टलों की हालत खराब : मेडिकल कॉलेज में पीजी व एमबीबीएस स्टूडेंट्स के रहने के लिए होस्टलों की हालत खराब है। इसी समस्या को मद्देनजर रखते हुए नए होस्टल का निर्माण किया जा रहा है। होस्टल निर्माण की गति यदि इसी तरह चलती रही तो बिल्डिंग तैयार होने में 6 से 8 माह लग सकते हैं। जबकि जुलाई में नए सेशन के एडमिशन होने शुरू हो जाएंगे।




मेडिकल कॉलेज में अधूरा हॉस्टल, जिसमें 160 कमरे बनने हैं, 2 करोड़ खर्च होंगे।

फरवरी में जारी हो जाएगा फंड : प्रिंसिपल

॥फरवरी माह में ठेकेदार को पैसे जारी कर दिए जाएंगे। उम्मीद है कि जुलाई अगस्त तक यह होस्टल बनकर तैयार हो जाएंगे। कॉलेज में 86-86 कमरों के दो होस्टल बनाए जा रहे हैं, जिनमें से एक होस्टल में इंटर्न ((लड़के)) जबकि दूसरे में लड़कियां रहेंगी। अस्पताल के होस्टल में पीजी स्टूडेंट्स चले जाएंगे।

फंड न मिलने से निर्माण कार्य बंद : जेई

॥ होस्टल का निर्माण करा रहे बीएंडआर विभाग के जेई गुरजंट सिंह ने बताया कि होस्टल का निर्माण कर रहे ठेकेदार ने फंड न मिलने की सूरत में काम करना छोड़ दिया है। ठेकेदार निजी तौर पर करीब 50 लाख रुपए तक के काम करा चुका है। जबकि उसे फंड रिलीज नहीं किया गया।