शहर में सस्ती रेत मिलना आसान नहीं
राणा रणधीर। पटियाला
प्रशासन के सस्ती रेत मुहैया कराने के दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं। भास्कर इनवेस्टिगेशन में सामने आया कि सिर्फ ट्रांस्पोर्टेशन खर्च कम करके लोगों को सस्ती रेत उपलब्ध कराना उतना आसान नहीं जितना सरकार दावे कर रही है।
शुक्रवार को जिले की खड्डों ((बनूड़ के पास तेपला व होशियारपुर के पास)) से रेत लाने के लिए ट्रांस्पोर्टेशन के टेंडर लगाए गए। जिला मंडी अफसर, जिला माइनिंग अफसर व जिला ट्रांसपोर्ट अधिकारी ((डीटीओ)) की तीन मेंबरी कमेटी का गठन हुआ था। डीटीओ गुरप्रीत सिंह थिंद के मुताबिक कुल 20 टेंडर आए हैं। इनमें अलग-अलग रेट हैं। कम रेट डालने वाले ट्रांसपोर्टस को रेत लाने का काम सौंपा जाएगा।
डीसी जीके सिंह के मुताबिक उन्होंने विभिन्न ट्रांसपोर्टस से खड्डों से जिले की पांच मंडियों में रेत लाने के रेट मांगे है। सरकार चयनित ट्रांसपोर्टस से ट्रांस्पोर्टेशन, ठेकेदार की रॉयल्टी, लेबर और कुछ अन्य प्रशासनिक खर्चों ((टोल टैक्स बगैरहा)) के अलावा कोई दूसरे खर्चा नहीं लेगी। उनके मुताबिक ऐसे रेत के मौजूदा रेट 50 फीसदी तक कम हो जाएंगे। पटियाला ट्रक यूनियन प्रधान पाल सिंह कुल्लेमाजरा के मुताबिक ट्रांस्पोर्टेशन, रॉयल्टी, लेबर और टोल टैक्स के अलावा और कोई खर्च होता ही नहीं है। सरकार के अन्य खर्च छोडऩे की बात बेमानी है। जो खर्चे सरकार ले रही है, उसमें तेपला से पटियाला तक पहुंचते पहुंचते रेत कैसे सस्ती होगी, समझ से परे है। सरकार की शर्त है कि 200 क्यूबिक फीट से ज्यादा रेत लोड नहीं करनी। तेपला खड्ड में रेत 1800 रुपए प्रति 100 क्यूबिक फीट है। 200 फीट रेत 3600 की है। लगभग 800 रुपए लेबर, 6 हजार रुपए ट्रांस्पोर्टेशन। 200 फीट रेत की गाड़ी 10400 रुपए में पड़ेगी। मान लो जिला प्रशासन इस खर्च से ट्रांस्पोर्टेशन का लगभग 2 हजार रुपए कम भी कर देती है। तो भी रेत की गाड़ी 8400 रुपए में मिलेगी। आम आदमी को रेत 42 रुपए क्यूबिक फीट में पड़ेगी।
कंस्ट्रक्शन के बिजनेस से जुड़े रमेश कुमार के मुताबिक तेपला खड्ड की रेत सबसे निम्न दर्जे की मानी जाती है। इसमें मिट्टी मिली होती है। प्लस्तर को दूर, चिनाई में भी इसका प्रयोग नहीं होगा। यह रेत सरकारी ठेकेदार गलियां, नालियां बनाने में प्रयोग करते हैं।
जीके सिंह, डीसी पटियाला
भास्कर: आपने कम रेट वाले ट्रक को टेंडर दे दिया तो क्या बाकी लोगों को रेत नहीं लाने देंगे?
डीसी: नहीं, हम किसी को नहीं रोकेंगे, चाहे कोई ट्रांसपोर्टस कितने मर्जी पैसे ले। हम तो सिर्फ कम दाम लेने वाले ट्रांसपोर्टरों से रेत मंगवाएंगे, जिससे लोगों को रेत कम दाम पर मिले।
भास्कर: लेकिन कोई ट्रांसपोर्टर कैसे कम दाम पर मानेगा, जबकि उसके साथ वाले ट्रांसपोर्टर पूरे दाम ले रहे होंगे। ये स्कीम लंबे समय तक कैसे चलेगी?
डीसी: सब अफसरों को निर्देश दे दिए हैं, काम चल रहा है, एक बार पूरा हो लेने दीजिए फिर बात करना।
गुरदास सिंह, जिला माइनिंग अधिकारी
भास्कर: जो ट्रक वाला पहले 6 हजार लेता था, मान लो वह 4 से 5 हजार रुपए ले लेगा? तो क्या रेत सिर्फ वही लाएगा या बाकी महंगे दाम पर रेत लाने वाले ट्रांसपोर्टर भी काम करते रहेंगे?
अफसर: मुझे इसकी जानकारी नहीं है।
भास्कर: अगर एक ट्रक वाला तेपला से पटियाला रेत लाने के 6 हजार रु ले रहा है। तो कोई आपके लिए सस्ती रेत 4 या 5 हजार में रेत क्यों लाएगा? कोई घाटा क्यों खाएगा?
अफसर: जब डिप्टी सीएम से मीटिंग हो रही थी तो सिर्फ डीसी ही अंदर थे, इस मुद्दे पर क्या फैसला हुआ है, हमें नहीं पता है।
गुरप्रीत सिंह थिंद, डीटीओ
भास्कर: किस प्लानिंग के तहत सस्ती रेत कैसे मिलेगी?
डीटीओ: देखिए खड्ड के रेट तो वहीं रहेंगे। हम तो सिर्फ खड्ड से शहर तक रेत लाने वाले ट्रांसपोर्ट का रेट कम कर रहे हैं।
भास्कर: सिर्फ ट्रांसपोर्ट का रेट कम करने से कितनी रेत सस्ती होगी।
डीटीओ: मुझे लगता है कि 30 से 50 फीसदी तक सस्ती होगी
भास्कर: जो सस्ते रेट पर रेत लाएगा, क्या खड्ड से रेत लाने का जिम्मा सिर्फ उसी ट्रांसपोर्टरों का होगा या बाकी भी ला सकते हैं।
डीटीओ: ये मुझे नहीं पता, आप माइनिंग अधिकारी से बात करो।
अधिकारियों ने एक दूसरे पर डाली जिम्मेदारी, नहीं बताया कैसे मिलेगी सस्ती रेत
ट्रक यूनियन के प्रधान ने कहा कि इसके अलावा और कोई खर्च होता ही नहीं तो प्रशासन क्या लोगा
सरकार का दावा, ट्रांस्पोर्टेशन, रॉयल्टी, लेबर और प्रशासनिक खर्चों के अलावा कोई खर्च नहीं लेंगे
ये खर्चे लेकर भी तेपला खड्ड की रेत 42 रु क्यूबिक फीट तक मिलेगी, तो फिर सस्ती कैसे हुई?