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राजिंदरा में निजी लैब व डॉक्टरों की मिलीभगत से हो रही लूटपाट

8 वर्ष पहले
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ञ्चस्पुटम टेस्ट के लेते 500 से 3200 रुपए फीस
सोबन गुसांई - पटियाला
राजिंदरा अस्पताल में डॉक्टर व निजी लैब संचालक की मिलीभगत से चलने वाला स्कैंडल सामने आया है। स्कैंडल के मुताबिक मरीज को पता भी नहीं होता कि उसका किस चीज का टेस्ट होना है। डॉक्टर वार्ड में निजी लैब का मुलाजिम भेजकर खून का सैंपल निकलवा लेता है। मरीज से टेस्ट की मोटी रकम वसूली जाती है। पर्ची में रेफरेंस के नाम पर कोड वर्ड लिखा जाता है। इस बात का खुलासा ‘भास्कर संवाददाता’ की पड़ताल में हुआ है।
वीरवार की सुबह वार्ड नंबर 10 में एक व्यक्ति आया। वह वार्ड में एडमिट कैथल निवासी जगत राम का सैंपल लेने लगा। भास्कर संवाददाता के पूछने पर उसने अपनी पहचान किसी दूसरे लैब की बताई। बाद में उसने पूछताछ में खुद को लीला भवन स्थित एक निजी लैब का मुलाजिम निकला। उसने टेस्ट किट मरीज जगत राम ((60)) के बेड पर रखी। किट से इंजेक्शन निकालकर जब वह सैंपल ले रहा था। फोटो खींचने पर वह मुलाजिम वार्ड से भाग गया। जगत राम ने भास्कर संवाददाता को बातया कि वह पहले ही 6000 रुपए के टेस्ट करा चुका है। वार्ड नंबर 10 में 30 फीसदी ऐसे मरीज हैं, जिनके निजी लैब मुलाजिम ने किसी न किसी समस्या के चलते स्पुटम टेस्ट ((थूक के टेस्ट)) लिए गए हैं। इसके लिए 500 से लेकर 3200 रुपए की मोटी फीस वसूली। 50 फीसदी ऐसे मरीज हैं जिनके खून टेस्ट से लेकर हीमोग्लोबिन, टीएलसी, डीएलसी, ईसीआर जैसे टेस्ट भी बाहरी लैब्स से करवाए गए। वार्ड की हर फाइल में प्राइवेट लैब की टेस्ट रिपोर्ट पड़ी हुई है। निजी लैब मुलाजिम डाक्टर को फोन करके पूछता है कि वार्ड में किस किस मरीज का व कौन कौन सा टेस्ट होना है। डॉक्टर मरीजों के नाम व मुलाजिम को टाइम बताता है। मुलाजिम को उस समय वार्ड में बुलाया जाता है जिस समय वह वार्ड में उपस्थित नहीं रहता। सुबह 7 से लेकर 9 बजे व सांय 5 बजे से 6 तक निजी लैब मुलाजिम वार्डों से सैंपल लेकर चला जाता है।



डॉ. हरशिंदर, डीएमएस

विन्नी महाजन, सेक्रेटरी

मैं खुद मामला देखूंगी

भास्कर: राजिंदरा की लैब की घुसपैठ जारी है। कार्रवाई क्यों नहीं।

सेक्रेटरी: एमएस को आदेश जारी किए हैं।

भास्कर: आदेश के बावजूद कोई सुधार नहीं है।

सेक्रेटरी: मैं खुद मामले को देखूंगी।

भास्कर: कब तक कार्रवाई संभव है।

सेक्रेटरी: जल्द जांच कराएंगे।

नहीं करवा सकती कार्रवाई

॥ एमएस डॉ. वीके शारदा ने कहा कि बाहर हैं। डिप्टी एमएस डॉ. हरशिंदर कौर ने बताया कि टेस्ट प्रोफेसर स्तर के डॉक्टर करवाते हैं। कार्रवाई नहीं कर सकती।ञ्जञ्ज

केस हिस्ट्री

खन्ना के कृष्ण लाल ने बताया कि उसे सांस की परेशानी है। तीन दिन पहले वह वार्ड में दाखिल हुआ, गरीब होने के चलते उसकी पूअर फ्री फाइल बन गई। वार्ड में दाखिल होते ही उससे खून टेस्ट के बदले 820 रुपए ले लिए। इसके बाद स्पुटम टेस्ट किया गया, जिसके उससे 480 रुपए वसूले।

छाती की समस्या थी - कैथल निवासी जगत राम छाती की समस्या को लेकर अस्पताल में दाखिल हुआ था। सरकारी नौकर होने के चलते फाइल फ्री बनी लेकिन वार्ड में आते ही निजी लैब ने स्पुटम टेस्ट के बदले उससे पहले 3200 व बाद में 2450 रुपए ले लिए। बाद में एचबी, टीएलसी व डीएलसी के 640 रुपए लिए गए।

फाइल पूअर फ्री, वसूले हजारों

सुबह 9 व शाम 5 बजे के बाद लिए जाते सैंपल

भास्कर पड़ताल - वार्ड-१० में एडमिट ३० फीसदी मरीजों के हो चुके स्पुटम टेस्ट