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लेक्चररों को रिवर्ट करने के खिलाफ धरना

7 वर्ष पहले
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पटियाला - शिक्षा विभाग ने मई 2012 व अलग अलग कोर्ट केसों से पदोन्नत किए लेक्चररों को रिवर्ट करने के फैसले के खिलाफ प्रमोटिड लेक्चरर फ्रंट ने सोमवार को डिविजन कमिश्नर के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। डिविजनल कमिश्नर को शिक्षा मंत्री व प्रमुख सचिव शिक्षा विभाग के नाम मांग पत्र सौंपा। अध्यापकों ने कहा, गलतियों व नाकामियों को छिपाने के लिए लिटिगेशन की आड़ में लेक्चरर्स को बिना वजह परेशान किया जा रहा है।
गवर्नमेंट टीचर यूनियन ((विज्ञान)) से परमजीत सिंह, रणजीत सिंह मान, बलराज जोशी, मनिंदर सिंह गिल, इंद्रजीत सिंह बाला, डॉ. नरिंदरपाल सिंह, अध्यापक दल पंजाब से जगमेल सिंह शेरगिल, एससीबीसी अध्यापक यूनियन पंजाब से मनोज थापर, मलागर सिंह समेत कई यूनियनों ने लेक्चररों को समर्थन देने का ऐलान किया।



ञ्चशिक्षा विभाग ने लेक्चरर प्रमोशन के लिए केस मंगाए थे। नियमों के अनुसार अप्लाई किया गया। सर्विस रिकार्ड जांचने के बाद ही विभाग ने मई 2012 में प्रमोशन दी थी।

ञ्चविभाग ने 2012 से पहले की गई तरक्कियां भाव 1997, 2001 व 2008 में भी प्रमोशन केस मांगे। मास्टर कॉडर से लेक्चरर पदोन्नति कभी भी सीनियरता अनुसार नहीं हुई। क्योंकि मास्टर कॉडर के सभी कर्मचारी लेक्चरर तरक्की की योग्यताएं पूरी नहीं करते। कट ऑफ डेट के आधार पर ही तरक्की के केस मांगे गए और विभाग की पुरानी परंपरा के मुताबिक ही प्रमोशन हुए।

ञ्चविभाग के पास लेक्चरर कॉडर की 4420 पोस्टें खाली हैं। सरकार को योग्य उम्मीदवारों को तरक्की देनी चाहिए।

ञ्चविषय मुताबिक सीनियरता 19 जुलाई 2013 को जारी की गई है जोकि मास्टर कॉडर से संबंधित है। जो लेक्चरर पहले ही प्रमोट हो चुके हैं, इसलिए यह सूची उन पर लागू नहीं होती।



ये है लेक्चररों के तर्क