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भारतीय क्लासिकल का तो अलग आनंद

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - पटियाला
वेस्टर्न म्यूजिक बहुत अच्छा है पर भारतीय क्लासिकल का अपना अलग आनंद है। क्लासिकल म्यूजिक इंसान को खराब स्थिति में आत्मिक शांति का अहसास दिलाता है।
यह बात जर्मन की पियानो आर्टिस्ट वरीना शेखनवा ने कही। वह भारतीय संगीत और जर्मनी संगीत पर विशेष लेक्चर देने सरकारी कॉलेज ऑफ एजुकेशन में पहुंचीं थीं। मंगलवार को उन्होंने स्टूडेंट्स को संगीत की खूबियां और बारीकियां बताईं। उन्होंने पियानो के साथ-साथ वेस्टर्न और इंडियन क्लासिकल म्यूजिक का कम्पेरिजन किया। शेखनवा को तबला बजाने में विशेष महारत हासिल हैं। वाइस प्रिंसिपल राजन नरूला ने कहा कि संगीत में उनकी दिलचस्पी है। वह हर साल यहां संगीत की बारीकियां सीखती हैं। प्रिंसिपल डॉ. नीलम जीत कौर ने वरीना के बारे में बताया।




बाला कृष्णन से सीखा भरत नाट्यम

पापा ने भारत जाकर इंस्ट्रूमेंट सीखने की सलाह दी और कहा कि उन्होंने भी नरूला फैमिली से सितार सीखी, तुम जाकर राजन नरूला से तबला सीखो। छह साल से हर साल वैकेशन में भारत आकर तबला सीख रही हूं। साउथ इंडिया में भरत नाट्यम बालाकृष्णन से सीखा। भारतीय संगीत मुझे अपनी और खींचता है। यहां के हर युवा को इस पर गर्व होना चाहिए कि उनके पास संगीत के नाम पर बहुत कीमती चीज है।

वरीना शेखनवा म्यूनिख ((जर्मनी))

इंडियन क्लासिकल म्यूजिक तो मेरे ब्लड में हैं। 40 साल पहले मेरे पापा ने पटियाला में नरूला फैमिली से सितार बजानी सीखी थी। तब से संगीत रूह में बस गया। वेस्टर्न म्यूजिक अच्छा है। जो आपकी बॉडी में हलचल है, वैसी लाइफ क्लासिकल म्यूजिक में है और उसे सुनकर आत्मा को सुकून मिलता है। जर्मनी के म्यूनिख शहर निवासी शेखनवा ने कहा कि वो प्रोफेशनल पियानो आर्टिस्ट हैं और बच्चों को ट्यूशन देती हैं। तबले की शौकीन वरीना छह साल से स्टेट कॉलेज की वाइस प्रिंसिपल राजन नरूला से तबला बजाना सीख रही हैं। वरीना बोलीं मेरी मां साउथ इंडियन और पिता जर्मनी के हैं।



बोलीं मैने तो पापा से सितार बजानी सीखी थी

जर्मन पियानो आर्टिस्ट वरीना शेखनवा ने सरकारी एजुकेशन कॉलेज में वेस्टर्न और क्लासिकल का किया कम्पेरिजन