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साहित्यकार बोले डोंट डिजर्व दीज थैंक्स, कॉन्फ्रेंस का पता ही नहीं था
प्रतिभा विरदी - पटियाला
‘मैं न तो इनवाइटेड था और न ही मैंने कॉन्फ्रेंस अटेंड की, इसलिए थैंक्स डिजर्व ही नहीं करता’ साहित्यकार चमन लाल ने मेल से पंजाबी यूनिवर्सिटी के पंजाबी विकास विभाग को यह जबाव भेजा है। साहित्यकार मदन गोपाल सिंह ने विभाग को मेल की, उन्होंने लिखा, ‘ऐह सब कदों होएया ते कित्थे होएया, नाचीज नूं इस अंतर्राष्ट्रीय समागम दा किते कोई अता पता तक नहीं लग्गा, फेर वी बोहत बोहत मुबारकां जी।’
पीयू के पंजाबी भाषा विभाग ने 21 से 23 जनवरी को 30वीं पंजाबी विकास कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। देश-विदेश के डेलिगेट्स को न्योता देकर बुलाया। कॉन्फ्रेंस होने के बाद विभाग ने सभी को मेल भेजकर शुक्रिया किया। विभाग ने दरियादिली जरूर दिखाई कि जिन साहित्यकारों को बुलाया भी नहीं, उनका भी मेल भेजकर आभार जताया। साहित्यकारों ने अपने अंदाज में नाराजगी जताई और कॉन्फ्रेंस की सफलता पर सवालिया निशान लगाया। जीएनयू दिल्ली से रिटायर्ड प्रोफेसर व सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ पंजाब बठिंडा के सेंटर फार पंजाबी लैंग्वेज, लिटरेचर व कल्चर लैंग्वेज के प्रोफेसर व कोआर्डिनेटर चमनलाल ने कहा कि उन्होंने काफी अरसे तक पीयू में पढ़ाया है। कॉन्फ्रेंस के बारे में पता नहीं था। विभाग ने जनरल थैंक्स करने के लिए मेल कर दी। ये बात थोड़ी अजीब लगी तो जवाब में हमने भी कह दिया कि थैंक्स की क्या जरूरत है।
विभागाध्यक्ष डॉ. जसबीर कौर ने कहा कि विभाग से सभी को कहा गया था कि वो कॉन्फ्रेंस में पहुंचे। कुछ कारणों से कई साहित्यकार पहुंच नहीं पाए। काफी साहित्यकारों को देरी से लेटर मिले। लेटर पहुंचने में समस्या हो जाती हैं। छुट्टियां आ जाती हैं, या लेटर इधर उधर हो जाते हैं। विभाग ने जो आए और जो नहीं आ सके, उनको शुक्रिया अदा किया। कंप्यूटर ऑपरेटर से कहा था कि वह सभी को थैंक्स मेल कर दे।
जो नहीं आ सके उनको भी धन्यवाद: जसबीर कौर