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तेपला खड्ड की रेत से प्लस्तर करने पर बनी रहती नमी
भास्कर न्यूज - पटियाला
प्रशासन जिस तेपला और होशियारपुर के खड्ड से रेत लाकर उसे जिले की मंडियों में सस्ता बेचने का दावा कर रहा है, विशेषज्ञ उसकी क्वालिटी पर सवाल उठा रहे हैं।
उनका मानना है कि रेत के कण ज्यादा होने से प्लास्तर होने के बाद नमी बनी रहती है और इसे किसी भी सूरत में दूर नहीं किया जा सकता है। तेपला खड्ड की रेत में मिट्टी के कण ज्यादा होने से इसका कोई खरीदार ही नहीं मिलता है। होशियारपुर की खड्ड भी निचली क्वालिटी की होती है।
प्लास्तर के बाद दीवार से निकलती रहती मिट्टी
अर्बन एस्टेट में रेत के व्यापारी जयपाल गर्ग ने कहा कि तेपला की रेत सबसे घटिया मानी जाती है। शुरू शुरू में तेपला से रेत ले आए, पर कोई खरीदार ही नहीं मिला। रेत में मिट्टी ज्यादा होने से वह मिट्टी ही लगती है। इससे बेहतर है कि
आदमी मिट्टी से ही चिनाई करवा ले। होशियारपुर के खड्डों की रेत बारीक होने से उसे चिनाई या लेंटर में नहीं डाल सकते। यह रेत प्लस्तर के लिए ठीक रहती है क्योंकि बारीक होने के कारण सफाई बेहतर रहती है।
जयपाल गर्ग।
सरकार की सस्ती रेत देने की योजना