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यूनिवर्सिटी में बजे रबाब, सारंदा, ताऊस, दिलरूबा और इसराज

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - पटियाला
गुरमति संगीत के मौलिक साजो और सुखन संगीत की चुनिंदा विधाओं की पेशकारी पीयू के गुरमति संगीत विभाग में दी हुई। गुरमति कॉलेज माता सुंदरी जी दिल्ली के स्टूडेंट्स, रिसर्चर ने बाब, सारंदा, ताऊस, दिलरूबा और इसराज को बजाया।
गुरमति कॉलेज माता सुंदरी जी दिल्ली के स्टूडेंट्स, रिसर्चर व टीचर्स का एजुकेशन का टूर विशेष तौर पर विभाग पहुंचा। कॉलेज चेयरमैन हरिंदरपाल सिंह की अगुवाई में सदस्यों ने मौलिक साज पेशकारी दी। विभाग के हेड डॉ. गुरनाम सिंह ने विभाग के कराए जा रहे कार्यों के बारे में बताया। विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर अमनदीप सिंह व अली अकबर ने गुरमति संगीत में इस्तेमाल होने वाले मौलिक साजों में रबाब, सारंदा, ताऊस, दिलरूबा और इसराज की पेशकारी दी। विभाग के रिसर्च स्कॉलर जतिंदर सिंह, दिलराज ग्रेवाल और गुरमीत सिंह ने शाह मुहम्मद की रचना जंगनामा की प्रस्तुति दी। साहिब सिंह, गुरप्रीत सिंह ने गायन पेश किया।
पीयू के वीसी डॉ. जसपाल सिंह ने कहा कि पंजाबी गायकी के नाम पर आज शोर और जोर से भरपूर गायकी हो रही है। पंजाबी सुखन संगीत ऐसी गायकी का बदलाव बनेगी। पंजाबी काव्य की गायकी को प्रोत्साहित करने के लिए सभी पंजाबियों को आगे आना चाहिए। दिल्ली से पहुंचे इन गायक कलाकारों की यूनिवर्सिटी में होने वाली विभिन्न कॉन्फ्रेंस और सेमिनारों में पेशकारियां करवाई जाएंगी। गुरमति कॉलेज चेयरमैन हरिंदरपाल सिंह ने पीयू को गुरमति संगीत व पंजाबी विरासत की संभाल का विश्व प्रसिद्ध केंद्र बताया। यहां भावना मलिक, परमवीर सिंह, रमन चहल, डॉ. कंवलजीत सिंह व अन्य मौजूद रहे।



हङ्क्षरदरपाल सिंह को सम्मानित करते पीयू के वीसी जसपाल सिंह।