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बूथ अलॉटमेंट को लेकर शहरी अकाली लीडरों में उभरे मतभेद

8 वर्ष पहले
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प्रमुख संवाददाता - पटियाला
पटियाला शहरी कांग्रेस की तरह पटियाला शहरी अकाली जत्था भी आपसी मतभेदों से अछूता नहीं।
अकाली उम्मीदवार दीपइंदर सिंह ढिल्लों के पटियाला शहर में प्रचार को सही तरीके से चलाने के लिए लोकल अकाली लीडरों में बूथ बांटे जाने को लेकर अब मामला उभरा है। जानकारों के मुताबिक जिस तरीके से बूथ बांटे गए, उसे लेकर कई स्थानीय अकाली नेताओं ने नाराजगी जताई। लीडरों ने तर्क दिया कि बूथ अलॉट करते समय यह ध्यान में ही नहीं रखा गया कि संबंधित अकाली लीडर का उसे अलॉट किए जा रहे बूथ्स के इलाकों में जनाधार है भी या नहीं। विरोध के चलते शहरी अकाली जत्थे को अपना फैसले से यू-टर्न लेना भी पड़ा और नए सिरे से बूथ अलॉट किए गए।
170 बूथ में से ४५ भाजपा को
पटियाला शहर में लगभग 170 बूथ हैं। इनमें से लगभग 45 बूथ में ढिल्लों के प्रचार का जिम्मा अकाली दल की भागीदार पार्टी भाजपा को जारी किए गए। शेष बूथ में से 10-10 के हिसाब से बूथ यहां अकाली नेताओं में प्रचार के लिए बांट दिए गए। बूथ की इसी अलॉटमेंट को लेकर ही शहरी अकाली जत्थे में मतभेद उभरा। बूथ की अलॉटमेंट को लेकर कई अकाली लीडरों ने नाराजगी जाहिर की। कहा गया कि जिस अकाली लीडर का ज्यादा जनाधार जिस इलाके में है, वहां के बूथ्स अन्य अकाली लीडर को सौंप दिए गए। विरोध जताने वाले अकाली लीडरों ने कहा कि अगर बगैर जनाधार वाले इलाके किसी पार्टी नेता को सौंप दिए जाते हैं तो वहां ढिल्लों का प्रचार सही तरीके से नहीं हो पाएगा।




‘जिनां दे ढिड्ड च पीड़ हुंदी है, उह इदां दियां गल्लां करदे नें’

॥बूथ बांटे जाने के तरीके को लेकर अकाली लीडरों में मतभेद के बारे शहरी अकाली जत्था प्रधान जत्थेदार इंदरमोहन सिंह बजाज ने कहा,‘जिनां दे ढिड्ड च पीड़ हुंदी है, उह ही इदां दियां गल्लां करदे नें।’ बूथ अलॉटमेंट को लेकर किसी प्रकार के मतभेद से हालांकि बजाज ने इनकार किया लेकिन उन्होंने यह भी कहा दिया, ‘झगड़ा तां घर घर च हुंदा है। पार्टी ने सारे अकाली लीडरां नूं जिम्मेदारी सौंपी है, ते ऐह बड़ी चंगी चीका ऐ।’ बजाज तो यह भी कह गए कि आपके ऑफिस स्टाफ में भी मतभेद तो होता होगा।ञ्जञ्ज

पार्टी जानकारों मुताबिक यहां पुरानी कबाड़ी मार्किट में सीनियर बादल की शमूलियत वाली जो चुनावी रैली पिछले बुधवार को आयोजित की गई थी, उसमें लोगों की शमूलियत के बारे भी पार्टी हाईकमान ने असंतोष जताया। इस बारे में डिप्टी सीएम सुखबीर बादल के ओएसडी चरणजीत सिंह बराड़ ने अकाली कौंसलरों से मीटिंग भी की। जानकार बताते हैं कि बराड़ ने शहरी अकाली जत्थे की इस बारे में खिंचाई की कि अगर शहर में बड़े बादल की रैली में लोग नहीं जुटा सकते तो रैली करने की जरूरत ही क्या है। गौरतलब है कि उस रैली में संबोधन के दौरान बड़े बादल ने भी स्थानीय अकालियों को अपने सभी मतभेद भुलाकर ढिल्लों के लिए एकजुट होकर काम करने को कहा था।



बादल की रैली में कम लोग पहुंचे, हाईकमान ने असंतोष जताया

सियासत - ढिल्लों के प्रचार के लिए अकाली दल ने बांटे थे बूथ, मतभेद के बाद पार्टी का यू-टर्न