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डाउनलोड करेंअजमेर - जिला एवं सत्र न्यायालय ने दवाओं के कच्चे माल में मिलावट करने के मामले में दो आरोपियों को सात साल की सजा और एक-एक लाख रुपए का जुर्माने से दंडित किया है। विशिष्ट लोक अभियोजक विवेक पाराशर ने बताया कि 12 मार्च 2011 को टॉडगढ़ थाना क्षेत्र के रामपुरा खाडेमाल गांव में पुलिस को सूचना मिली थी कि एक दवाओं के ट्रक में असली जीवन रक्षक दवाओं के कच्चे माल के स्थान पर उनमें खडिय़ा मिट्टी, नमक एवं मिनरल वाटर मिलाया जा रहा था। थाना प्रभारी छोटेलाल मीणा ने औषधि नियंत्रक अधिकारी ईश्वर सिंह यादव की मौजूदगी में दबिश दी। पुलिस ने अजमाल सिंह व मोती सिंह को गिरफ्तार कर 11 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
औषधि नियंत्रक अधिकारी यादव ने दवाओं के कच्चे माल के नमूने लिए और प्रयोगशाला में जांच करवाई। लैब रिपोर्ट में भी नकली दवाओं के कच्चे माल की पुष्टि हुई। अदालत ने दोनों आरोपियों को सात वर्ष की सजा एवं एक-एक लाख रुपए के जुर्माने से दंडित किया है। कोर्ट ने शेष आरोपियों को बरी कर दिया।
मास्टर माइंड है अजमाल: अजमाल पहले दवा फैक्ट्री में काम कर चुका है। दवा बनाने के लिए कहां से कच्चा माल आता है इसकी जानकारी थी। अजमाल ने गिरोह बना नकली दवाओं का कारोबार शुरू किया। जीवन रक्षक दवाओं का अहमदाबाद से कंटेनर लेकर आ रहे मोती को गिरोह में शामिल कर लिया। दवाओं को बदलने का काम अजमाल घर पर किया करता था। कंपनी से दवाओं की सप्लाई के दौरान कंटेनर और उसमें रखे ड्रमों पर ट्रांसपोर्टर्स एवं कंपनी की सील लगी होती है। अजमाल इस सील को खोलना एवं बंद करना जानता था।
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