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अब अबला नहीं हैं महिलाएं

8 वर्ष पहले
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अजमेर - जिला प्रमुख सीमा माहेश्वरी ने कहा कि अब महिलाएं वंचित और अबला नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं की रचनात्मक भागीदारी नजर आती है। माहेश्वरी जिला परिषद व इंदिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान की ओर से गुरूवार को मेरवाड़ा एस्टेट में ‘जेंडर संवेदी शासन’ विषयक दो दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला में संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव की जरूरत है ताकि वे निर्भीक होकर पुरुषों के साथ कंधे से कंधा
मिलाकर सामाजिक विकास में भागीदारी निभा सकें।
कार्यशाला में महिलाओं की सामाजिक, सांस्कृतिक व राजनीतिक भागीदारी तथा महिला सशक्तिकरण से संबंधित मुद्दों पर मंथन किया गया।




कार्यशाला में उपजिला शिक्षा अधिकारी प्रदीप मेहरोत्रा ने भी ‘राजस्थान में जेंडर संवेदी शासन हेतु वांछित प्रमुख मुद्दे’ पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक क्षेत्रों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी का अभाव है। ग्राम सभा, वार्ड सभा व पंचायत समिति की बैठकों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व होने के बावजूद भागीदारी गौण ही बनी हुई है। यह परिदृश्य बदलने की जरूरत है। कार्यशाला में उपजिला शिक्षा अधिकारी भगवती प्रसाद ने पॉवर प्वाइंट प्रजेंटेशन दिया। कार्यशाला को मुख्य आयोजना अधिकारी बीना वर्मा एवं डॉ$ सुनीता टेकचंदानी ने भी संबोधित किया।
कार्यशाला के अंतिम सत्र में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सीआर मीना ने कहा कि जेंडर समानता के आधार पर सभी मानव अधिकारों एवं विकास आयामों में लगातार प्रगति पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। तभी महिलाएं भी पुरुषों के समान मानव अधिकारों का उपयोग करने में सक्षम बन सकेंगी। कार्यशाला में भ्रूण हत्या विषयक मार्मिक फिल्म ‘उसका आना’ को प्रदर्शित कर उस पर चर्चा की गई। इस अवसर पर प्रधान, उपप्रधान, ग्राम विकास अधिकारी व जिला परिषद सदस्य समेत कई कर्मचारी उपस्थित थे। संचालन वर्तिका शर्मा ने किया।