आयोग व एलआईसी से जवाब तलब
भास्कर न्यूज - अजमेर
जीवन बीमा निगम के ही एक कर्मचारी के आश्रित को मृत कर्मचारी की बीमा पॉलिसी का भुगतान लेने के लिए कई साल से चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। बीमा पॉलिसियों की जानकारी लेने के लिए मृतक कर्मचारी के पुत्र ने सूचना के अधिकार के तहत बीमा निगम के आला अधिकारियों से लेकर केंद्रीय सूचना आयोग तक गुहार लगा ली, लेकिन उसे जानकारी नहीं मिली। पीडि़त की ओर से केंद्रीय सूचना आयोग और बीमा निगम के खिलाफ दायर रिट पर हाईकोर्ट ने दो सप्ताह में जवाब पेश करने के आदेश दिए हैं। मामले के अनुसार भारतीय जीवन बीमा निगम की ओर से एक युवक को पिछले 14 सालों से उसके पिता मृतक बालू सिंह की दो पॉलिसियों के भुगतान के बारे में कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। बीमा निगम में कार्यरत बालू सिंह की मृत्यु 1983 में हुई थी। बालू सिंह का इकलौता पुत्र नारायणसिंह पिता की मृत्यु के समय केवल 12 साल का था। उसके पिता से पहले माता की भी मृत्यु हो चुकी थी। बाद में बेटे को पिता के कुछ कागज मिले।
इन कागजों में जीवन बीमा की दो पॉलिसियों का जिक्र था। बालू सिंह ने दो पॉलिसियों में से एक संख्या 25425622 का नोमिनी अपनी पत्नी और दूसरी पॉलिसी संख्या 25790163 का नोमिनी बेटे नारायण को बनाया था अब बेटा निगम से दोनों पॉलिसियों के बारे में जानकारी मांग रहा है। उसने आरटीआई के तहत सभी स्तर पर लड़ाई लड़ी लेकिन उसे जानकारी नहीं मिल पाई। मामला केंद्रीय सूचना आयोग तक पहुंचा।
आयोग ने निगम को आदेश दिए कि नारायणसिंह को दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन कराए लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जनवरी 2013 में आयोग ने भी कह दिया कि नारायण को वांछित सूचना मिल गई है। आखिर थक हार कर नारायण ने हाईकोर्ट में में रिट दायर की है। रिट की प्रांरभिक सुनवाई करते हुए केंद्रीय सूचना आयोग और भारतीय जीवन बीमा निगम को दो सप्ताह में आवश्यक रूप से जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।