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तपस्या से मिली विद्या है ज्योतिष

8 वर्ष पहले
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ज्योतिष प्रशिक्षण शिविर का समापन
अजमेर - राजस्थान संस्कृत अकादमी जयपुर और श्री नर्मदेश्वर संन्यास आश्रम परमार्थ ट्रस्ट सर्किल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित बीस दिवसीय ज्योतिष प्रशिक्षण शिविर का शुक्रवार को समापन हुआ। इस मौके पर मुख्य अतिथि भूपेंद्र भटनागर ने कहा कि ज्योतिष विद्या असीम कष्ट, साहस और तपस्या से मिली विद्या है। ज्योतिष का उद्भव वेदों से हुआ और इसका विकास पुराणों में हुआ। सनातन धर्म के अठारह ऋषियों ने इसे दिशा दी। ज्योतिष हिंदू सनातन धर्म की महान देन है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कृष्णानंद गिरि ने कहा कि ज्योतिष शास्त्र एक आध्यात्मिक विज्ञान है, जिसकी अनिवार्यता सभी गुणों में रही है। ज्योतिष विज्ञान द्वारा मानव अपनी दिशा व दशा दोनों को सुगम कर सकता है। कार्यक्रम में रामचंद्र शास्त्री, आचार्य कैलाशचंद्र, नवल किशोर शर्मा और राघव मिश्र मौजूद थे।