मानव जन्म भी पुण्यकर्म का फल
भास्कर न्यूज - अजमेर
आर्यिका विभा माता ने कहा कि मानव जन्म का पाना पुण्य कर्म का फल है, जबकि जैन धर्म को पाना कई जन्मों के पुण्य का फल है। जैन धर्म के अनुसार त्याग व संयम के माध्यम से आत्मा को विशुद्ध बना लेना श्रेष्ठ पुण्य एवं पुरुषार्थ का फल माना गया है। इसलिए मानव जीवन व्यर्थ न करें और अपना चिंतन सन्मार्ग पर लगाएं। आर्यिका विभा शुक्रवार को अजमेर में नए धड़े की नसियां में मंगल प्रवेश के दौरान लोगों को संबोधित कर रही थीं।
धर्म में मन लगाया तो मोक्ष संभव : आर्यिका विभा माता ने कहा कि कोई धर्म में पैसा लगाता है, कोई समय लगाता है। उन्होंने कहा कि धर्म तन, मन और धन तीनों माध्यम से किया जा सकता है। धर्म में तन और धन तो कोई भी लगा सकता है, लेकिन जिसने धर्म में मन लगा लिया तो उसका कल्याण और मोक्ष संभव है।
आर्यिका का ससंघ मंगल प्रवेश : आर्यिका विभाश्री माता का ससंघ मंगल प्रवेश अजमेर में हुआ। माता ससंघ किशनगढ़ से विहार करते हुए अजमेर पहुंचा। सुबह 9.30 बजे जिला परिषद कार्यालय से जुलूस के रूप में अग्रसेन चौराहे होते हुए नए धड़े की नसिया में प्रवेश हुआ। माता के प्रवेश कार्यक्रम के दौरान मंच के संदीप बोहरा, कमल गंगवाल, कैलाश सेठी, मनीष पाटनी, सुनील पल्लीवाल, टीकमचंद, सुनील बडज़ात्या, चंकी सेठी, कमल बडज़ात्या, अचला जैन, मधु पाटौदी सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद थे।