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मैग्जीन का नया नाम ‘अजमेर का किला एवं संग्रहालय’
भास्कर न्यूज. अजमेर
अजमेर शहर का राजकीय संग्रहालय अब ‘अजमेर का किला एवं संग्रहालय’ के नाम से जाना जाएगा। किले के बाहर लगे बोर्ड पर अब शहर के लोग अब इसे अजमेर का किला एवं संग्रहालय के नाम से पढ़ेंगे। एकरूपता लाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। इसी के मद्देनजर अकबरी किले और राजकीय संग्रहालय को अब अजमेर का किला और संग्रहालय कर दिया गया है।
अकबर ने बनवाया था
अजमेर के किले को 1570 में मुगल शासक अकबर ने बनवाया था। अकबर ने इस किले को जब बनवाया था तब इसका नाम दौलत खाना रखा गया था। मुगल शासन के बाद भारत पर अंग्रेजों का राज्य हो गया। तब अंग्रेज शासकों ने इसे मैग्जीन बना दिया। सन 1908 में इसे राजपूताना संग्रहालय का नाम दिया गया। अंग्रेजों से भारत को आजादी के बाद ऐतिहासिक धरोहरों और इमारतों को पुरातत्व विभाग ने अपने संरक्षण में ले लिया। तब से इसका नाम राजकीय संग्रहालय रखा गया।
कई मुगल शासक आए: अजमेर के किले में कई मुगल शासक आए। इतिहास से जानकारी के मुताबिक जहांगीर और शाहजहां कई बार इस किले में भ्रमण के लिए आए और यहां आकर रुके। नूरजहां भी अजमेर के किले में आकर रुकी हैं।
किले हैं राष्ट्रीयता के प्रतीक भी: विधायक वासुदेव देवनानी ने कहा कि हर जगह शहर के नाम से किले होते हैं जैसे चित्तौड़, आमेर का किला। अजमेर भी अजमेर के किले के नाम से होना चाहिए। किसी भी शहर में अगर इमारतें शहर के नाम से जानी जाती हैं तो ये राष्ट्रीयता दर्शाती हैं। अजमेर का किले होने से अजमेर के पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और अजमेर विश्व मानचित्र पर चमकेगा।