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बेटियों ने दिया मां की अर्थी को कंधा

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - अजमेर
बेटे और बेटी में फर्क नहीं होता। फर्क होता है तो बस भावनाओं को का। इन्हीं पंक्तियों को साकार किया है स्वर्गीया कृष्णा सिसोदिया की बेटियों ने। कायस्थ मोहल्ला पुरानी मंडी निवासी कृष्णा देवी का निधन 23 जनवरी को हो गया था। इनके पुत्र नहीं था। बड़ी बेटी-दामाद डॉ जया वर्मा-डॉ खेमराज सऊदी अरब में थे। डॉ जया ने इच्छा जताई कि वे अजमेर आकर अपनी मां की अर्थी को कंधा देंगी। यही इच्छा मारवाड़ जंक्शन में रहन वाले बेटी-दामाद रजनी-नेमीचंद ने भी जताई। 25 जनवरी को कृष्णा देवी का अंतिम संस्कार किया गया। बेटी जया वर्मा, रजनी तथा इंदु ने मां की अर्थी को कंधा दिया। मुखाग्नि भी बेटी और दामाद ने ही दी। पिता विजेंद्र कुमार सिसोदिया ने भास्कर को बताया कि तीनों बेटियों को रहते हुए उन्हें कभी बेटे की कमी नहीं खली। अंत में भी यही हुआ, जब अर्थी को कंधा देने का वक्त आया, तो बेटियों ने इस रस्म को हिम्मत के साथ निभाया।