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छोटे एलपीजी सिलेंडरों का गोरखधंधा

7 वर्ष पहले
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अजमेर. नौ सिलेंडरों के बाद खत्म हुई सब्सिडी ने लोगों की जेब ढीली करने के साथ शहर में छोटे सिलेंडरों के अवैध कारोबार को भी बढ़ा दिया। नियमों और सुरक्षा को दरकिनार कर छोटे सिलेंडर खुलेआम बिक रहे हैं। एक व दो किलो वजनी सिलेंडरों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है, इसके बावजूद इन्हें बाजारों में बेचा जा रहा है। पांच किलो वाले सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी सिर्फ गैस एजेंसियों से ही हो सकती है, लेकिन इसका उलट हो रहा है।

‘भास्कर’ ने पड़ताल की तो सामने आया कि शहर में दो दर्जन से अधिक दुकानों पर यह सिलेंडर खुलेआम बिक रहे हैं। आगरा गेट, नला बाजार, डिग्गी बाजार, दरगाह बाजार, उसरी गेट, आशागंज, पड़ाव, कवंडसपुरा, मदारगेट सहित अन्य क्षेत्रों में दुकानों पर यह सिलेंडर देखे जा सकते हैं। इन दुकानों पर कोई भी व्यक्ति आकर पांच किलो का खाली सिलेंडर देकर भरा सिलेंडर ले जा सकता है। पैसे देकर भरा सिलेंडर बगैर किसी फार्मेलिटी के लिया जा सकता है। पांच किलो का सिलेंडर एजेंसी को 152 रुपए में पड़ता है लेकिन दुकानदार इसके तीन सौ से चार सौ रुपए तक वसूल रहे हैं।

कहां से आ रहे हैं सिलेंडर

गैस एजेंसियों के पास जो छोटे सिलेंडर हैं, उनमें बाकायदा संबंधित कंपनियों का मार्का लगा है। कुछ दुकानों में पांच किलो वाले सिलेंडर पर किसी तरह का कोई मार्का या मुहर नहीं लगी। सिलेंडरों की ज्वाइंट की वैल्डिंग भी रफ है। जब दुकानदारों से पूछा गया कि सिलेंडर कहां से आ रहे हैं तो उन्होंने बताने के साफ इनकार कर दिया।

कभी रिकॉर्ड तक दर्ज नहीं

शहर में एक व दो किलो वाले कितने सिलेंडर हैं, इसका रिकॉर्ड गैस कंपनियों और जिला रसद विभाग के पास भी नहीं है। अफसरों को नहीं पता कि शहर में 5 किलो वाले सिलेंडरों की अधिकृत सप्लाई कितनी है। अधिकारियों का पूरा ध्यान घरेलू और कॉमर्शियल सिलेंडरों की बिक्री पर ही है। इसलिए छोटे सिलेंडरों का कारोबार तेजी से फैल रहा है।

जोधपुर में हो चुके हैं ब्लास्ट!

छोटे सिलेंडरों से ब्लास्ट के मामले पूर्व में जोधपुर में सामने आ चुके हैं। यहां तीन ब्लास्ट हुए और एक बिल्डिंग तो पूरी ध्वस्त हो गई थी। बाजारों में जो सिलेंडर बिक रहे हैं वे सभी अवैध और मानक स्टेंडर्ड के अनुरूप नहीं हैं। बिहार में एक हादसे के बाद इन सिलेंडरों पर से प्रतिबंध लगा दिया गया था। वहीं दूसरी ओर गैस कंपनियों द्वारा जारी सिलेंडर के निर्माण व रिफिलिंग मानक स्टेंडर्ड के अनुरूप है।

घरेलू सिलेंडरों से रिफिलिंग

पड़ताल में चौंकाने वाली जानकारी यह मिली कि इनकी रिफिलिंग घरेलू सिलेंडरों से की जा रही है। इसके लिए जिस पंप का इस्तेमाल किया जा रहा है, वे चायनीज है। इसका एक सिरा बड़े सिलेंडर में तथा दूसरा छोटे सिलेंडर में अटैच किया जाता है। इसमें लगा मीटर बताता है कि कितनी गैस छोटे सिलेंडर में चली गई। रिफिलिंग का यह तरीका और यंत्र दोनों ही गैरकानूनी हैं। गंभीर हादसा भी हो सकता है।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने 1 व 2 किलो वजन के सिलेंडर प्रतिबंधित कर रखे हैं। पांच किलो के सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी भी केवल अधिकृत गैस एजेंसियों से ही हो सकती हैं। हर एजेंसी का छोटे सिलेंडरों का कोटा है। जिस प्रक्रिया से बड़े सिलेंडर मिलते हैं, वैसे ही छोटे सिलेंडर भी लिए जा सकते हैं। इसके लिए बाकायदा कार्ड में एंट्री करवानी होती है।

ऐसे लिए जा सकते हैं छोटे सिलेंडर

यह मेरी जानकारी में नहीं है कि बाजारों में बिना मार्का वाले छोटे सिलेंडर बेचे जा रहे हैं। गैस कंपनियों से यह जानकारी ली जाएगी कि कितने सिलेंडर रिलीज किए गए हैं और इन सिलेंडरों की बुकिंग व डिलीवरी कैसे हो रही है। बाजार में अवैध तरीके से सिलेंडर बेचने वालों के खिलाफ गैस कंपनियों के अधिकारियों के साथ मिलकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - सुनीता डागा, जिला रसद अधिकारी

5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर केवल संबंधित गैस कंपनी की एजेंसी से ही सप्लाई किए जा सकते हैं। यदि छोटे सिलेंडर बाजारों में और दुकानों पर मिल रहे हैं तो यह पूरी तरह से गलत है। यह नियमों के खिलाफ है। - संदीप पंवार, डिप्टी मैनेजर (सैल्स), बीपीसीएल