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डाउनलोड करेंअजमेर. निकट भविष्य में वन अधिकारी फील्ड में ही स्मार्ट फोन और टेबलेट पर डिजिटाइज्ड वन सीमाओं को देख सकेंगे। वन विभाग की ओर से इस दिशा में ने कवायद शुरू कर दी है। वन विभाग द्वारा डिजिटाइज्ड वन सीमाओं का उपयोग वर्तमान में कार्य आयोजना बनाने तथा बायो स्फीयर रिजर्व, ग्रीन इंडिया मिशन आदि की योजना बनाने में किया जा रहा है। इसी क्रम में अब सूचना एवं प्रौद्योगिकी प्रभाग द्वारा इन डिजिटाइज्ड वन सीमाओं को प्रबंधन एवं प्रबोधन के लिए वन अधिकारियों को उपलब्ध कराए जाने की योजना बनाई गई है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक फिलहाल एक प्रोग्राम के द्वारा इन वन सीमाओं को एनरॉइड प्लेटफॉर्म वाले तथा जीपीएस सुविधा वाले किसी भी हाई एंड स्मार्ट फोन और टेबलेट पर अपलोड किया जा सकता है। राजकीय दौरों के समय इनके माध्यम से वन खंडों की स्थिति देखी जा सकेगी तथा उन तक पहुंचा जा सकेगा। भविष्य में विकास कार्यों के स्थलों को भी इस सुविधा से जोडऩे का प्रयास किया जाएगा।
विधिक कार्यों के लिए उपयोग नहीं
मुख्य वन संरक्षक अरिंदम तोमर के मुताबिक इन वन सीमाओं का उपयोग विधिक कार्यों के लिए नहीं किया जा सकता है। इस सुविधा का उपयोग करने के इच्छुक अधिकारी सूचना प्रौद्योगिकी प्रभाग से संपर्क कर सकते हैं। इस सुविधा के उपयोग के लिए उपकरण डीजीएसएंडडी पर उपलब्ध है।
इन जिलों की सीमाएं देखी जा सकेंगी
तोमर के मुताबिक फिलहाल अजमेर संभाग के भीलवाड़ा, नागौर व टोंक के साथ ही सीकर, झालावाड़, झुंझुनूं, जैसलमेर, पाली, धौलपुर, जोधपुर, जालौर, दौसा, सवाई माधोपुर, बारां, बूंदी और भरतपुर जिले की वन सीमाएं इस प्रयोजन के उपलब्ध कराई हैं।
अजमेर की बाद में
अजमेर समेत अन्य जिलों की वन सीमाओं का डिजिटाइजेशन होने के बाद इनकी सीमाएं भी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा सकेंगी। मुख्य वन संरक्षक सूचना एवं प्रौद्योगिकी अरिंदम तोमर ने इस संबंध में प्रदेश के सभी मुख्य वन संरक्षकों, सभी वन संरक्षकों और सभी उप वन संरक्षकों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
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