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- ‘बच्चों के पुनर्वास के लिए पुलिस से निरंतर संवाद की जरूरत’
‘बच्चों के पुनर्वास के लिए पुलिस से निरंतर संवाद की जरूरत’
भास्कर न्यूज - अजमेर
राज्य एवं केंद्र सरकारों के विभिन्न प्रयासों के बावजूद बच्चों को उनके अधिकार ठीक से नहीं मिल पाए हैं। बच्चों की सुरक्षा के लिए समाज के बाकी लोगों को भी आगे आना होगा। अकेले पुलिस ही बच्चों का संपूर्ण पुनर्वास नहीं कर सकती। जिला पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल कुमार ने मंगलवार को कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों, सीएलजी सीडब्ल्यूसी, जेजेबी के सदस्यों एवं स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिकाओं पर चर्चा करते हुए यह विचार व्यक्त किए। उन्होंने स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका पर कहा कि बच्चों के पुनर्वास में पुलिस के साथ मिलकर निरंतर संवाद और समीक्षा की जरूरत है।
सेंटर फॉर सोशियल डिफेंस एंड जेंडर स्टडीज, राजस्थान पुलिस अकादमी जयपुर एवं यूनिसेफ राजस्थान के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का मंगलवार को समापन हुआ। कार्यशाला के प्रथम सत्र में लैंगिक अपराधों से बच्चों की सुरक्षा कानून पर एडिशनल एसपी अनुकृति उज्जैनिया ने संबोधित करते हुए कहा कि आईपीसी में यौन अपराध से बच्चों की सुरक्षा के लिए अलग से कठोर कार्रवाई नहीं थी और न ही यह पीडि़त वयस्कों में भेद नहीं करती है। इस अधिनियम के तहत अपराधों की सुनवाई एवं त्वरित न्याय के लिए विशेष अदालत की स्थापना के लिए राज्य सरकार उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से सलाह करके राजपत्र में अधिसूचना करके प्रत्येक जिले के लिए अधिनियम के अधीन अपराधों पर सुनवाई के लिए विशेष अदालतों की स्थापना होगी।
जिसमें न्यायिक प्रक्रिया के हर चरण में बच्चों के हित को सर्वोपरि महत्व दिया जाएगा। उन्होंने एक्ट के प्रावधानों,विशेष अदालत की स्थापना, अपराध एवं सजाओं , मामलों की रिपोर्ट की प्रक्रिया, पीडि़त के लिए राहत और पुनर्वास, विशेष लोक अभियोजक, शीघ्र निपटान एवं केंद्र और राज्य सरकारों की जिम्मेदारियों पर चर्चा की। इस मौके पर यदुराज शर्मा और धीरज वर्मा ने बच्चों की सुरक्षा के लिए बाल मित्रवत एवं जनमित्र पुलिस के विभिन्न संदर्भों एवं सफल कार्यक्रमों के बारे में बताया।