आरएसएस का ‘स्वर निनाद’ शिविर आज से
भास्कर न्यूज - अजमेर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चित्तौड़ प्रांत के तत्वावधान में गुरुवार से चार दिवसीय ‘स्वर निनाद’ शिविर शुरू होगा।आजाद पार्क में चलने वाले शिविर में 11 जिलों के करीब 700 घोष वादक भाग लेंगे। इस अवसर पर 1 फरवरी को स्वयंसेवकों का संचलन निकलेगा।पटेल मैदान में 2 फरवरी को अपराह्न 3 बजे होने वाले शिविर के समापन समारोह को सरसंघ चालक मोहनराव भागवत संबोधित करेंगे।संघ ने शिविर की सभी तैयारियों को पूरा कर लिया है।
संघ के अखिल भारतीय सह शारीरिक प्रमुख जगदीश प्रसाद ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में बताया कि ‘स्वर निनाद’ शिविर में प्रदेश के 11 जिलों के करीब 6 सौ से 7 सौ घोष वादक हिस्सा लेंगे। शिविर में सभी वादक प्रतिदिन 5 घंटे सामूहिक अभ्यास करेंगे। इस दौरान उन्हें भिन्न-भिन्न प्रकार की व्यूह रचनाओं का अभ्यास कराया जाएगा। प्रसाद ने बताया कि शिविर में हिस्सा लेने वाले वादक पेशेवर नहीं हैं। इन सभी वादकों का 1 फरवरी को सुबह 11 बजे संचलन होगा।
शिविर का समापन पटेल मैदान में 2 फरवरी को अपराह्न 3 बजे होगा। शिविर में बांसवाड़ा, उदयपुर, डूंगरपुर, बारां, कोटा, चित्तौड़, अजयमेरु विभाग, अजमेर, भीलवाड़ा, जयपुर, जोधपुर जिले शामिल हैं।शिविर में भाग लेने वाले स्वयंसेवक अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर स्वयंसेवकों को तैयार करेंगे।
संघ के घोष का इतिहास व क्रमिक विकास : एक नजर
जगदीश प्रसाद ने बताया कि संघ की स्थापना के बाद स्वयंसेवकों ने एक बैंड उधार लिया था। इसके बाद उन्होंने पैसा एकत्र कर अपना पहला ‘शंख’((बिगुल)) खरीदा। इसे बजाने वाले पहले वादक मार्तंड राव जोग थे। संघ संस्थापक डॉ हेडगेवार के परिचित बैरिस्टर गोविंदराव देशमुख के सहयोग से सेना से निवृत एक बैंड मास्टर के पास स्वयंसेवक घोष प्रशिक्षण के लिए जाने लगे। द्वितीय सरसंघ चालक गुरुजी के कार्यकाल में घोष का विस्तार हुआ। पुणे के हरि विनायक दात्ये ने भारतीय राग सारंग में प्रथम वंशी’ की रचना की। इसका नाम ‘गणेश’ रखा गया। इसी प्रकार कर्नाटक के स्वयंसेवक ने ‘शंख’ में अश्वगति नाम से एक रचना की। बाद में इसका नाम ‘चेतक’ रखा गया। उन्होंने बताया कि स्वयंसेवकों द्वारा बनाई गई करीब 40 रचनाओं को नौ सेना दल ने भी अपने ब्रास बैंड पर बजाया है। 1982 में भारत में संपन्न एशियाई खेल के उद्घाटन समारोह में नौ सेना दल ने शिवराज ((मंद भूप)) रचना का वादन किया था। प्रसाद ने बताया कि वर्तमान में 30 से अधिक प्रांतों में करीब दो हजार से अधिक शृंग वादक अभ्यास करते हैं। राजस्थान भर के घोष वादकों का एक दो दिवसीय वृहत्त शिविर 1974 में कानोता ((जयपुर)) में लगाया गया है।
भागवत 1 को आएंगे
संघ के अखिल भारतीय सह शारीरिक प्रमुख ने बताया कि सरसंघचालक मोहनराव भागवत 1 फरवरी को अजमेर आएंगे। भागवत शिविर के समापन समारोह में हिस्सा लेंगे। उन्होंने बताया कि भागवत स्वयं भी वाद्य यंत्रों के जानकार हैं। उनके अनुभव का लाभ भी स्वयंसेवकों को मिलेगा। भागवत शिविर में स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन भी करेंगे।