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पद स्थानांतरित ताकि जगह बदलनी न पड़े

7 वर्ष पहले
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अजमेर - उत्तर-पश्चिम रेलवे अजमेर मंडल में मंडल कार्यालय के अफसरों ने प्रभावशाली स्टेशन मास्टरों को पदोन्नति का लाभ देने के लिए पद ही स्थानांतरित कर लिए ताकि पदोन्नति के बाद किसी को स्थानांतरित नहीं होना पड़े। अफसर यह भी भूल गए कि इससे ‘नेम नोटिंग’ कराने वाले स्टेशन मास्टरों के अधिकारों का नुकसान हुआ है। सभी १४ पद छह माह के लिए स्थानांतरित किए गए थे, लेकिन नौ माह बीतने को हैं पदों को मूल स्थान पर स्थानांतरित नहीं किया गया। मंडल कार्यालय के सहायक कार्मिक अधिकारी प्रतुल सारोलिया ने 17 मई 2013 को एक आदेश जारी कर स्टेशन अधीक्षक पीबी-2 ग्रेड-पे 4600 और स्टेशन मास्टर पीबी-2 ग्रेड-पे 4200 के 22 पदों को स्थानांतरित किया था। सभी स्टेशन मास्टर उक्त पदों पर जमे हुए हैं।
जबकि यह छह माह तो 16 सितंबर को ही समाप्त हो चुके हैं। आदेश में यह भी बताया गया है कि भविष्य में पदोन्नति संबंधित रेलवे बोर्ड, प्रधान कार्यालय जयपुर, सुप्रीम कोर्ट, केट, कोर्ट निर्णय आदेश निर्देश प्राप्त होते हैं तो पदोन्नति आदेशों में तदानुसार परिवर्तन किया जा सकता है।
जहां एसएम थे, उसी स्टेशन पर बने अधीक्षक
कर्मचारियों को पीबी-2 ग्रेड-पे 4600 में पदोन्नत करने के आदेश में 14 स्टेशन मास्टरों ((एसएम)) को स्टेशन अधीक्षक बनाया गया था। विभाग द्वारा जारी की गई पदोन्नति सूची में रूपेश कुमार पंवार को दौराई, मुकेश जोशी को उमरा, रविंद्र जोशी को झड़वासा, कुशालचंद शर्मा को उदयपुर, अमर कुमार भट्ट को आबूरोड, मनोज कुमार को ब्यावर, अरुण कुमार तिवारी को राणाप्रताप नगर, राधेश्याम शर्मा को भीलवाड़ा, श्रीनारायण पाराशर को पुष्कर, मुख्तार आलम को नसीराबाद, सत्यनारायण शर्मा को उदयपुर, नारायण रानी, अनिल कुमार केन को आदर्शनगर और जमनालाल को सोजत रोड रेलवे स्टेशन पर अधीक्षक पद नहीं होते हुए अस्थाई तौर पर छह माह के लिए स्टेशन अधीक्षक लगाया गया था। पूर्व में सभी उक्त स्टेशनों पर स्टेशन मास्टर के पद पर तैनात थे।
नेम नोटिंग को किया अनदेखा
आदेश में रेल प्रबंधक के अनुमोदन का हवाला देते हुए यह भी बताया गया कि इसमें नेम नोटिंग को अनदेखा किया गया है। छह माह के लिए अस्थाई रूप से स्थानांतरित करने के इस आदेश की अवधि पूरी हुए करीब ढाई माह निकल चुका है, लेकिन अब तक न तो संशोधित आदेश जारी किए गए और न ही कोई अन्य आदेश जारी किया।