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अंतिम छोर तक बसे किसानों को मिले लाभ - सिंघवी
अजमेर - प्रशासनिक सुधार, मानव संसाधन एवं जनशक्ति आयोजना समिति के अध्यक्ष डॉ एनएम सिंघवी ने कहा कि सिंचित क्षेत्र में कराए जाने वाले विकास कार्यों का लाभ अंतिम छोर पर बसे किसान तक पहुंचना चाहिए। इससे समाज और राष्ट्र का विकास संभव होगा। हमें शिक्षण व्यवस्था में भी जल बचाने के लिए प्रभावी बदलाव करने होंगे, ताकि विद्यार्थी इसके महत्व को समझें और भविष्य में जल बचाने के लिए प्रेरित हों। सिंघवी गुरुवार को संभागीय आयुक्त कार्यालय में सिंचित क्षेत्र विकास विभाग की बैठक में भाग लेने पहुंचे थे।
बैठक को संबोधित करते हुए सिंघवी ने कहा कि सिंचित क्षेत्रों में समस्याओं का स्थायी समाधान खोजा जाना चाहिए। हम इसके लिए प्रयास कर रहे हैं। विकास कार्यों का लाभ सभी किसानों को मिले, किसी तरह का असंतोष ना फैले और सभी संतुष्ट हों। तभी समाज व राष्ट्र को फायदा होगा। सिंघवी को बैठक के दौरान सिंचित क्षेत्र विकास विभाग और अन्य अधिकारियों ने फील्ड में सामने आ रही समस्याओं के बारे में बताया। संभागीय आयुक्त आरके मीना ने कहा कि जल बचत एवं किसानों को पानी समय पर पहुंचाना महत्वपूर्ण विषय है। पानी की कम से कम बर्बादी हो।
इसके लिए गंभीर कदम उठाए जाने की जरूरत है। सरकार इसके लिए प्रयास कर रही है। टोंक कलेक्टर डॉ टीना कुमार ने सिंचित क्षेत्र की समस्याओं के बारे में बताया एवं समाधान पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि सिंचित क्षेत्र में 22 छोटे-बड़े पानी के भराव क्षेत्र हैं। इनका जीर्णोद्धार कर पानी का भराव कर दिया जाए तो काफी राहत मिल सकती है। उन्होंने खाला निर्माण एवं रखरखाव के बारे में भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
उन्होंने बताया कि अंतिम छोर बसे किसानों को पानी पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती है। इसके लिए गंभीरता से प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न योजनाओं को लागू करने एवं रखरखाव में सबसे बडी कमी स्टाफ की है। पटवारी एवं अन्य पद भरे जाने चाहिए। बैठक में प्रशासनिक सुधार, मानव संसाधन एवं जनशक्ति आयोजना समिति के सचिव हरि सिंह राठौड़ और अतिरिक्त संभागीय आयुक्त हनुमान सिंह भाटी सहित कई अधिकारी उपस्थित थे।