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बाघिनों ने बढ़ाई सरिस्का प्रशासन की परेशानी
भास्कर न्यूज - अलवर
रणथंभौर अभयारण्य से करीब सालभर पहले सरिस्का शिफ्ट की गई बाघिन एसटी-9 व एसटी- 10 ने सरिस्का प्रशासन की मुसीबतें बढ़ाई हुई हैं। दोनों बाघिनों का मूवमेंट ग्रामीण इलाकों के पास ज्यादा रहता है। ऐसे में कई बार ये दोनों बाघिन ग्रामीणों के मवेशियों को भी शिकार बना रही है। बाघिनों की टेरेटरी अलवर-जयपुर हाइवे के आसपास होने से मॉनिटरिंग में लगी टीमों को हर समय इन पर कड़ी नजर रखनी पड़ रही है। सरिस्का अभयारण्य में 22 व 23 जनवरी 2013 को रणथंभौर से दोनों बाघिनों को शिफ्ट किया गया था। उस समय उनकी उम्र करीब दो साल चार महीने की थी। सरिस्का आने के बाद दोनों बाघिनों ने जंगल के काफी लंबे चौड़े एरिया को देखा। बाद में उन्होंने अपनी अलग-अलग टेरेटरी बनाई। बाघिन एसटी-9 ज्यादातर समय इंदोक, कुशालगढ़, रैकामाला, पानी ढाल, नाथूलोजसर इलाके में भ्रमण करती है। वहीं बाघिन एसटी-10 का राईका, वीणक, नलदेश्वर, पानी ढाल, कुशालगढ़ तिराहा से सिलीसेढ़ तक मूवमेंट रहता है। दोनों बाघिनों की टेरेटरी के आसपास कई गांव हैं। अलवर-जयपुर स्टेट हाइवे भी इन इलाकों से गुजरता है। ऐसे में वन विभाग ने सरिस्का प्रबंधन को दोनों बाघिनों पर विशेष मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हुए है।
हाल में रोकना पड़ा था ट्रैफिक
बाघिन एसटी-10 ने पहली बार हाइवे क्रास नहीं किया है। इससे पहले भी वह मेटिंग के लिए बाघ एसटी-4 के पास आ चुकी है। गत दिनों दोनों के हाइवे के पास पहुंचने की जानकारी मिलने के बाद सरिस्का प्रशासन ने करीब आधा घंटे तक हाइवे पर ट्रैफिक को रुकवा दिया था।
अतिरिक्त मुख्य वन संरक्षक पहुंचे सरिस्का
बाघिन एसटी-10 फिलहाल बाघ एसटी-4 के साथ घूम रही है। यह स्टेट हाईवे पार कर बाघ एसटी-4 के इलाके में आ गई है। दो दिन से दोनों नलदेश्वर के इलाके में भ्रमण कर रहे हैं। बाघिन कहीं हाइवे पर नहीं आ जाए, इसके लिए वन विभाग विशेष सतर्कता बरत रहा है। बुधवार के अतिरिक्त मुख्य वन संरक्षक पी.सोमशेखर भी सरिस्का आए। उन्होंने हाईवे पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।
बाघ ने किया था लालन-पालन
बाघिन एसटी-9 व एसटी-10 की मां टी-5 की संक्रमण के कारण मौत हो गई थी। उस समय ये काफी छोटी थी। मां की मौत के बाद रणथंभौर में एक बाघ ने दोनों को पाला था। ऐसे में मां के साथ शिकार के गुर सीखने थे वे वंचित रही। बताया जाता है कि कई बार तो दोनों बाघिनें रणथंभौर में होटल तक आ जाती थी। उनके भविष्य को देखते हुए ही दोनों को सरिस्का शिफ्ट किया था। विशेषज्ञों का मानना है कि मां का साथ नहीं मिलने के कारण ही ये दोनों रणथंभौर भी इंसानी इलाकों के आसपास रहने लगी थी।