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बंदी की मौत पर हंगामा

8 वर्ष पहले
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अलवर। सेंट्रल जेल में न्यायिक अभिरक्षा में बंद एक कैदी की शनिवार को राजीव गांधी चिकित्सालय में मौत हो गई। घटना के बाद बंदी के परिजनों ने अस्पताल गेट के बाहर जाम लगा दिया। आरोप है कि कठूमर थाने में की गई मारपीट से उसकी मौत हुई। एसपी विकास कुमार के आश्वासन के बाद जाम खोला गया।

गारू गांव निवासी राजू पुत्र अमर सिंह को कठूमर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उसे 23 जनवरी की दोपहर में अलवर जेल भेज दिया था। रात को ही राजू की तबीयत खराब हो गई। 24 जनवरी को जेल प्रशासन ने उसे सामान्य चिकित्सालय में भर्ती कराया। यहां शनिवार सुबह उसकी मौत हो गई।

परिजनों ने कठूमर थाना प्रभारी व स्टाफ के अन्य पुलिसकर्मियों पर राजू से मारपीट करने का आरोप लगाया। दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर शाम पौने पांच बजे परिजनों ने अस्पताल गेट के बाहर जाम लगा दिया। मृतक के पिता अमर सिंह, मां किशनप्यारी, बुआ लच्छो आदि परिवार के लोग सड़क पर लेट गए। घटना की जानकारी मिलने पर एडीएम सिटी प्रमोद जैन, एडीशन एसपी मुख्यालय शिवराज मीणा, सीओ सिटी सुरेंद्र सिंह राठौड़, कोतवाली थानाप्रभारी गणपत राम चौधरी पहुंचे।

एडीशनल एसपी ने समझाइश कर जाम खुलवाया लेकिन एसपी के अस्पताल नहीं पहुंचने तक परिजनों ने शव नहीं लिया। बाद में एसपी ने अस्पताल पहुंचकर निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजन शव लेने को राजी हुए। मृतक का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया है।

मृतक राजू के चाचा गोपाल ने बताया कि करीब तीन महीने पहले राजू का गांव के ही सुरेश, वीरेंद्र, लक्ष्मीनारायण, राजेश, बोना से किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया था। इस मामले में लक्ष्मीनारायण की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। 19 जनवरी को कठूमर पुलिस ने राजू को गिरफ्तार कर लिया।

गोपाल का कहना है कि 22 जनवरी तक गैर कानूनी रूप से थाने में रखा। इस दौरान मारपीट की। पुलिस ने अपने बचाव में 23 जनवरी को राजू को न्यायालय में पेश किया। जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।